यूं तो उम्र ब़ढने के साथ-साथ हड्डियों व मांसपेशियों का कमजोर होना स्वाभाविक बात है और ऐसे मरीजों के लिए डॉक्टर के पास जाकर इलाज करवाने के सिवाय दूसरा रास्ता नहीं बचता, मगर दुर्भाग्यपूर्ण तो यह है कि आजकल बहुत सारी महिलाओं व पुरुषों में २०-२५ साल की उम्र से ही आर्थराइटिस की बीमारी शुरू हो रही है। आर्थराइटिस में मरीज के लिए उठना-बेहद मुश्किल बन प़डता है।आर्थराइटिस का सबसे ब़डा कारण आज के अस्थि विशेषज्ञ अनियमित दिनचर्या को मानते हैं। असमय नींद से उठना, नहाना-धोना, खाना-पीना, सोना, नींद का न आना, बिल्कुल न चलना, बहुत दूर चलना, संतुलित आहार न लेना, फलों, सब्जियों व अनाजों में जहरीले पदार्थों का होना, छोटी, उम्र में मां बनना, बहुत ब़डी उम्र में मां बनना ये तमाम बातें आर्थराइटिस से जु़डी होती हैं।आर्थराइटिस का दर्द यूं तो सभी जो़डों में होता है मगर सबसे ज्यादा घुटनों को बुरी तरह प्रभावित करता है। इस दर्द में घुटनों के पास सूजन रहती है, लाली व जलन का अहसास भी आसानी से किया जा सकता है। जरा-सा पैर हिलाया कि तेज दर्द का अहसास। जो़डों का दर्द आनुवांशिक व रोजमर्रा के वाहन झटकों जैसी दुर्घटनाओं से भी हो सकता है। तमाम कारणों में से चिकित्सा वैज्ञानिकों ने कुछ कारणों को प्रभावी माना जो इस तरह हैं-

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