ramnik muni ji pravachan
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बेंगलूरु/दक्षिण भारत। वर्द्धमान स्थानकवासी जैन श्रावक संघ चिकपेट शाखा के तत्वावधान में यहां गोड़वाड़ भवन में उपाध्यायश्री रवींद्रमुनिजी ने सोमवार को मंगलाचरण से धर्मसभा की शुरुआत की। इस अवसर पर सलाहकारश्री रमणीकमुनिजी ने जन्माष्टमी पर्व पर प्रकाश डालते हुए सभी को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि सनातन परंपरा के इस पर्व को उत्तर भारत में उत्साह और उल्लास से मनाया जाता है।

उन्होंने कहा कि अपने आराध्य को दिल की गहराइयों से याद किया जाता है। देश और दुनिया में भगवान श्रीकृष्ण को मानने वाले असंख्य लोग हैं। रमणीकमुनिजी ने कहा कि जैन परंपरा के भावी तीर्थंकर हैं भगवान श्री कृष्ण, इस दृष्टि से वे हमारे लिए भी आराधनीय व पूजनीय हैं।

अपने आकर्षक व्यक्तित्व से हर किसी को अपनी ओर खींचने की ताकत जिसमें होती है वे कृष्ण सरीखे ही होते हैं।उन्होंने श्रीकृष्ण का जन्मदिवस मनाते हुए उनके पर्यायवाची नामों की लयबद्ध गीतिका प्रस्तुति की। मुनिश्री ने जन्माष्टमी के अवसर पर श्रीकृष्ण को अनंत उपकारी, परम ज्ञानी, करुणा की मूर्ति बताते हुए एवं उन्हें नमन करते हुए कहा कि कृष्ण का जो रसिया है, दीवाना है वह जात-पांत को भूल जाता है क्योंकि प्रसन्नता किसी एक जाति विशेष की जायदाद नहीं होती है।

श्रीकृष्णा को चित्तचोर यानी दिल चुराने वाला बताते हुए रमणीकमुनिजी ने कहा कि वे कहीं मुरलीधर हैं तो कहीं नारायण हैं। उन्होंने कहा कि श्रीकृष्ण का व्यक्तित्व प्रेम और मोहब्बत से जु़डा हुआ है, जाति-पांति से परे है। श्रीकृष्ण के होठों की मधुर मुस्कराहट सुहानी और दिलकश बनाती है। भगवान कृष्ण संसार के सुखों को भोगते हुए योगीराज बने।

उन्होंने कहा कि जो परमार्थ के लिए अपने जीवन को कुर्बान कर देते हैं, ऐसी पवित्र आत्मा वचन सिद्ध हो जाती है। वह हमेशा प्रार्थना एवं परोपकार स्वयं के लिए नहीं, दूसरों के लिए ही करते हैं। इससे पूर्व श्री ऋषिमुनिजी ने गीतिका सुनाई। धर्मसभा में उपप्रवर्तकश्री पारसमुनिजी ने मांगलिक प्रदान की।

चिकपेट शाखा के महामंत्री गौतमचंद धारीवाल ने संचालन किया। धारीवाल ने बताया कि सोमवार को चौमुखी जाप के लाभार्थी सुरेशलाल सौभागबाई समदि़डया का रवींद्रमुनिजी ने जैन दुपट्टा ओ़ढाकर सम्मान किया। उन्होंने बताया कि धर्म सभा में आध्यात्मिक चातुर्मास के मुख्य संयोजक रणजीतमल कानूंगा, दानमल सिंघी व राजेन्द्र कोठारी सहित कोटा, पंजाब, मुम्बई तथा शहर के विभिन्न उपनगरीय संघों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद थे।

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