sadhvi madhusmita ji
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बेंगलूरु/दक्षिण भारत। यहां के तेरापंथ सभा विजयनगर के तत्वावधान में अर्हम भवन में चातुर्मासार्थ विराजित साध्वीश्री मधुस्मिताजी के सान्निध्य में अखिल भारतीय तेरापंथ युवक परिषद् की विजयनगर शाखा के तत्वावधान में पर्युषण महापर्व के तृतीय दिवस सामायिक दिवस के उपलक्ष्य में अभिनव सामायिक का आयोजन किया गया।

तेयुप अध्यक्ष दिनेश मरोठी ने सभी का स्वागत किया। साध्वीश्री मधुस्मिताजी ने कहा कि महावीर वाणी का सार है समता। जैन आचार का सर्वोपरि तत्व है समता। साधना रूप महल में प्रविष्ट होकर आनंद का खजाना प्राप्त करने की चाबी है समता। तपस्या सेवाश्रम और स्वावलंबीता के द्वारा मिलने वाली सफलता समता का सवेग पाकर शत गुणित हो जाती है। समता वह असंदीपन दीप है जो इंसान की हर खतरे से सुरक्षा करता है।

साध्वीश्री सहजयशाजी ने त्रिपदी वंदना करवाई। ध्यान का प्रयोग साध्वीश्री भावयशाजी ने व स्वाध्याय प्रयोग साध्वीश्री मलिप्रभाजी द्वारा करवाया गया । साध्वीश्री स्वस्थप्रभाजी ने परमेष्ठी वंदना का मधुर स्वर लहरियां में संगान करवाया। सामायिक अभिनव के मौके पर उपस्थित तेयुप के राष्ट्रीय अध्यक्ष विमल कटारिया ने कहा कि समता की साधना का महत्वपूर्ण अंग है सामाजिक और चातुर्मास एवं पर्युषण में इसका विशिष्ट महत्व है।

इस कार्यक्रम में पर्युषण व्यवस्था सहयोगी शायर-हीरालाल मालू, वर्ण व्यवस्था सहयोगी सूरज-उत्साह चंडालिया, प्रवेश रैली सहयोगी सुनील नाहटा, अभिनव सामाजिक सहयोगी अशोक मार्ग एवं रात्रि कालीन कार्यक्रमों के प्रायोजक भंवरलाल मांडोत का सम्मान किया गया।

कार्यक्रम में राष्ट्रीय संगठन मंत्री पवन मांडोत, विजयनगर सभा अध्यक्ष बंशीलाल पितलिया सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित थे। कार्यक्रम का संचालन तेयुप मंत्री महावीर टेबा ने किया आभार ज्ञापन संयोजक मनोज बरड़िया ने किया।

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