बेंगलूरु/दक्षिण भारतयहां वर्द्धमान स्थानकवासी जैन श्रावक संघ चिकपेट शाखा के तत्वावधान में ं गोडवा़ड भवन में उपाध्यायश्री रवीन्द्र मुनिजी ने मंगलवार को मंगलाचरण से प्रवचन सभा की शुरुआत की। रमणीकमुनिजी ने अपने दैनिक प्रवचन में कहा कि श्रवण भगवान महावीर स्वामी की अंतिम देशना उतराध्ययन सूत्र को श्रवण करने वालों के लिए यह पल परम कल्याण के पल हैं। मन वचन काया से जिनवाणी से जु़डे रहने की सीख देते हुए उन्होंने कहा, पवित्र दिनों में पवित्र भाव से रहते हुए अपनी सांसों के खजाने को अद्भुत ज्ञान प्राप्त करने में हम लोग खर्च कर रहे हैं। यही अनमोल पल है, यही बहुमूल्य श्वांस है, जिन सांसों में अरिहंत को सुनते हुए बसाते हैं। मुनिश्री ने कहा कि हम सभी जिनवाणी के साथ साथ सत्य धर्म से जु़डी गाथा यानी सत्य युग की जीवन गाथा को आज कलयुग में सुन रहे हैं। सुनते-सुनते भी यदि श्रद्धालु के भाव में प्रवीणता आ जाए, भाव में अनुमोदन के पल आ जाएं तो इन पलों में सम्यकत्व की उपार्जना की जा सकती है। इसीलिए अतीत का उज्जवल चरित्र सुनाया जा रहा है। रमणीक मुनि जी ने कहा मैं स्वयं इसका वाचन करते करते आनंदमय अनुभव कर रहा हूं। विभिन्न गीतिकाओं के माध्यम से सत्यवादी राजा हरीश्चंद्र के चरित्र प्रसंग का वाचन करते हुए मुनिश्री ने कहा कि आत्मा के वैभव से परिचित होना जरूरी है। इससे पूर्व युवा मनीषी संतश्री ऋषि मुनि जी ने उतराध्ययन सूत्र का मूल पाठ गीतिका का वाचन किया। साथ ही प्रसंगवश संदेशप्रद लघु कथाएं भी श्रोताओं को सुनाई। धर्मसभा में श्री पारस मुनिजी ने मांगलिक प्रदान की। चिकपेट शाखा के मार्गदर्शक सम्पतराज धारीवाल ने बताया कि धर्म सभा में शहर के विभिन्न उपनगरीय संघांे से ब़डी संख्या में श्रद्धालू मौजूद थे। संचालन महामंत्री गौतमचंद धारीवाल ने किया।

LEAVE A REPLY