duttsharananand maharaj
duttsharananand maharaj

तिरुपति/दक्षिण भारत। गोधाम महातीर्थ पथमेड़ा न्यास शाखा दक्षिण भारत द्वारा तिरुमला तिरुपति धाम में आयोजित बालाजी चातुर्मास गोमंगल महोत्सव में पीवी मठ में चातुर्मासार्थ विराजित पथमेड़ा धाम के आदिसंस्थापक गोऋषि स्वामीश्री दत्तशरणानंदजी महाराज के सान्निध्य में जगतगुरु मलूकपीठाधीश्वर राजेंद्रदास देवाचार्यजी की श्री विष्णु पुराणकथा प्रारंभ हुई। पहले दिन देवाचार्यजी ने गौ महात्म्य पर कथा करते हुए कहा कि मनुष्य जब इस संसार में आया था तो उसके दोनों हाथ खाली थे एवं जब वह संसार से वापस जाएगा तब भी उसके दोनों हाथ खाली ही रहेंगे, फिर भी प्राणी पूरे जीवन धन-संपत्ति, घर, दुकान, गाड़ी, सोना-चांदी आदि भौतिक वस्तुओं का संकलन करता रहता है।

परमात्मा ने 84 लाख योनियां बनाई हैं, उनमें से भोजन सामग्री का कुछ प्रजातियों को छोड़कर कोई भी संग्रहण नहीं करता है एवं आनंदपूर्वक अपना जीवन व्यतीत करते हैं। एक मानव जाति ही ऐसी होती है जिसमें व्यक्ति जन्म के बाद जब से समझने लगता है तब से लेकर मृत्युपर्यंत मात्र संग्रह करने एवं भोग करने में ही जीवन पूर्ण करता है।

शास्त्रों में लिखा है कि मृत्यु उपरांत गाय ही पूंछ पकड़वाकर भवसागर से पार लगाती है। जीवनभर गाय की सेवा की ही नहीं तो पार उतारते समय गाय कहां से मिलेगी? इसलिए अपनी सामर्थ्य से कम या बिल्कुल गौसेवा नहीं करने से व्यक्ति अपना जीवन रोग-शोक-विचार आदि में गुजारता है एवं मृत्यु उपरांत भी जीव भटकता रहता है। अतः इस मानव जीवन का उपयोग गौसेवा में करके अपना कल्याण सुनिश्चित कर लें।

इस मौके पर अपना आशीर्वाद प्रदान करते हुए गौऋषि स्वामी श्रीदत्तशरणानंदजी महाराज ने कहा कि एक गाय ही ऐसा प्राणी है जो मानव मात्र को जाति, पंथ, संप्रदाय, क्षेत्र के भेदों को भुलाकर एक कर सकती है। उन्होंने कहा कि गोसेवा ही ऐसा अनुष्ठान है जिसमें छोटे- बड़े, अमीर-गरीब सभी एक समान पुत्रवत भाव से अपनी आहुति प्रदान कर सकती है। इस अवसर पर बेंगलूरु के ताराजी ग्रुप के हरिशंकर राजपुरोहित ने सपत्नीक व्यासपीठ का पूजन किया।

Facebook Comments

LEAVE A REPLY