चेन्नई/दक्षिण भारतस्थानीय जैन श्वेताम्बर तेरापंथी सभा के तत्वावधान में आचार्यश्री महाश्रमणजी के जन्मोत्सव, पट्टोत्सव तथा आगामी चातुर्मास के सेवा दायित्व ग्रहण हेतु चेन्नई से १३०० व्यक्तियों का संघ गुरु दर्शनार्थ विशाखापट्टनम पहुंचा। स्पेशल ट्रेन द्वारा इस यात्रा के संयोजक महावीर गेल़डा एवं उनकी टीम ने अथक श्रम करते हुए इस यात्रा की समुचित व्यवस्था की। २४ अप्रैल को प्रातः आचार्यश्री के जन्मदिवस का कार्यक्रम आयोजित हुआ। रात्रि में ‘एक शाम गुरु के नाम’’ विषयक भक्ति संध्या आयोजित की गई जिसमें कमल सेठिया, मीनाक्षी भूतोडिया, राकेश माण्डोत, कमल बैद, अशोक लुणावत व ललित दुग़ड आदि कलाकारों ने एक से ब़ढकर एक भक्तिमयी प्रस्तुतियों के साथ यहां के वातावरण को ‘महाश्रमणमय’’ बना दिया। २५ अप्रैल को आचार्यश्री का दीक्षा दिवस उल्लास से मनाया गया। गुरुदेव ने भी समस्त अभ्यर्थना को स्वीकार करते हुए इन शुभकामनाओं को साधना को और अधिक मुखरित करने की प्रेरणा बताया। कार्यक्रम में चेन्नई की ज्ञानशाला के ज्ञानार्थियों ने भावभीनी प्रस्तुति आचार्यश्री के समक्ष प्रस्तुत की। विशाखापट्टनम समिति द्वारा चेन्नई व्यवस्था समिति को दायित्व हस्तांतरित किया गया। जैन ध्वज को चेन्नईवासियों के हाथ देते ही सम्पूर्ण पण्डाल ओम् अर्हम् की ध्वनि से गूंजायमान हुआ। तमिल वेस्टी, शर्ट और तुण्डु के साथ पुरुष तथा तमिल साि़डयों में महिलाओं का नजारा देखते ही बनता था।मध्यान्ह सत्र में चेन्नई के विशाल संघ को आचार्यप्रवर ने सेवा-उपासना का समय प्रदान किया। आचार्यप्रवर के समक्ष सभाध्यक्ष धरमचंद लुंक़ड, महिला मण्डल की अध्यक्ष कमला गेल़डा, युवक परिषद् के अध्यक्ष मुकेश मुथा, अणुव्रत समिति के अध्यक्ष माला कातरेला, देवराज आच्छा, गौतमचन्द सेठिया, विमल चिप्प़ड, महावीर गेल़डा, ललित दूग़ड, वीडीएस गौतमकुमार सेठिया व तेजराज पुनमिया आदि वक्ताओं ने अपनी अभिव्यक्ति दी। इस मौके पर आचार्यश्री ने कहा कि ‘अब चेन्नई को मेजबान की भूमिका निभानी है, संस्कृत में कहा गया है – अतिथि देवो भवः इसलिए मेजबान को अतिथियों का समुचित ध्यान रखते हुए झुक कर चलना चाहिए।’’ उन्होंने कहा कि जीवन में कभी झुकना प़डता है, कभी रुकना भी प़डता है तो कभी कठोर भी बनना प़डता है। उन्होंने यह भी कहा कि कठिनाईयों के समक्ष झुके नहीं तथा अतिथियों के समक्ष झुकें व निर्णय लेने के लिए रुकें और निर्णय की क्रियान्विति कठोरता से करनी चाहिए। सायंकालीन आचार्यप्रवर ने विहार कर विशाखापट्टनम के मध्य स्थित एक श्रावक के घर निवास किया। विहार जुलूस में चेन्नई के श्रद्धालुओ ने अपनी संभागिता दर्ज की। २६ अप्रैल को चेन्नई की सेवा दायित्व का विधिवत् शुभारम्भ हुआ। लगभग ११ कि.मी. के विहार में सम्पूर्ण चेन्नईवासियों ने अपनी सेवा प्रदान की। स्पेशल ट्रेन ने मध्यान्ह प्रस्थान किया तथा शुक्रवार की मध्यान्ह समस्त यात्रीगण वापस चेन्नई पहुंचे।

LEAVE A REPLY