सेंचुरियन। युजवेंद्र चहल ने अपने करियर का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया और कलाईयों के दूसरे गेंदबाज कुलदीप यादव के सहयोग से फिर से दक्षिण अफ्रीका पर कहर बरपाकर भारत को दूसरे एकदिवसीय अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट मैच में रविवार को यहां आठ विकेट से ब़डी जीत दिलाई।चहल ने २२ रन देकर पांच विकेट लिए जबकि कुलदीप ने २० रन देकर तीन विकेट चटकाए जिससे दक्षिण अफ्रीकी टीम अपनी सरजमीं पर अब तक के अपने सबसे न्यूनतम स्कोर ११८ रन पर आउट हो गई। भारत ने केवल २०.३ ओवर में एक विकेट पर ११९ रन बनाकर छह मैचों की श्रृंखला में २-० से ब़ढत बनाई।भारत की तरफ से सलामी बल्लेबाज शिखर धवन (नाबाद ५१) और कप्तान विराट कोहली (नाबाद ४६) ने दूसरे विकेट के लिए ९३ रन की अटूट साझेदारी की। दक्षिण अफ्रीकी पारी जल्द समाप्त होने के कारण भारत को तुरंत ही अपनी पारी शुरू करनी प़डी लेकिन तब अजीबोगरीब स्थिति पैदा हो गई जब अंपायरों ने नियमों के अधीन उस समय लंच घोषित कर दिया जब भारतीय टीम लक्ष्य से केवल दो रन दूर थी। भारत ने आखिर में १७७ गेंद शेष रहते हुए जीत हासिल की जो उसकी शेष गेंदों के हिसाब से भारत से बाहर किसी टेस्ट खेलने वाले देश पर सबसे ब़डी जीत है। इस लिहाज से यह दक्षिण अफ्रीका की अपनी सरजमीं पर सबसे ब़डी हार है। डरबन में खेले गए पहले मैच की तरह इस मैच में भारत के कलाईयों के स्पिनरों का ही जादू चला। चहल और कुलदीप दोनों ने ४२ रन दिए और आठ विकेट लिए और दक्षिण अफ्रीका को ३२.२ ओवर में ढेर करने में मुख्य भूमिका निभाई।चहल का प्रदर्शन दक्षिण अफ्रीका में किसी भारतीय स्पिनर का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन है। इससे पहले युवराज सिंह ने २००३ में पीटरमैरित्जबर्ग में छह रन देकर चार विकेट लिए थे। चहल दक्षिण अफ्रीकी सरजमीं पर पांच विकेट लेने वाले दूसरे भारतीय गेंदबाज भी हैं। उनसे पहले आशीष नेहरा ने २००३ में पोर्ट एलिजाबेथ में इंग्लैंड के खिलाफ २३ रन देकर छह विकेट लिए थे। अनुभवी एबी डिविलियर्स और कप्तान फाफ डुप्लेसिस के चोटिल होने से पंगु बनी दक्षिण अफ्रीकी टीम के पांच बल्लेबाज दोहरे अंक में पहुंचे लेकिन कोई भी २५ से अधिक रन नहीं बना पाया। दक्षिण अफ्रीका ने अपने आखिरी छह विकेट १९ रन के अंदर गंवाए। इससे पहले उसका अपनी धरती पर न्यूनतम स्कोर ११९ रन था जो उसने इंग्लैंड के खिलाफ २००९ में पोर्ट एलिजाबेथ में बनाया था। यह इस मैदान पर किसी भी टीम का न्यूनतम स्कोर है। इससे पहले जिम्बाब्वे ने २००९ में दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ यहां ११९ रन बनाए थे।भारतीय बल्लेबाजों को इस तरह की कोई परेशानी नहीं हुई। रोहित शर्मा (१५) ने मोर्ने मोर्कल के पहले ओवर में ही छक्का ज़डकर अपने इरादे जतला दिए थे। वह हालांकि लगातार दूसरे मैच में देर तक नहीं टिक पाए और कैगिसो रबादा के बाउंसर पर हुक करके फाइन लेग पर कैच दे बैठे। इसके बाद धवन और कोहली ने सहजता से रन बटोरे। कोहली ने पिछले मैच की अपनी शतकीय पारी को ही आगे ब़ढाया। रबाडा की उठती गेंद को उन्होंने फाइन लेग पर छह रन के लिए भी भेजा। दक्षिण अफ्रीका के स्पिनर इमरान ताहिर और तबरेज शम्सी प्रभावित नहीं कर पाए। धवन और कोहली ने आसानी से उनके सामने रन बटोरे। बायें हाथ के बल्लेबाज धवन ने ४९ गेंदों पर अपना २४वां वनडे अर्धशतक पूरा किया। उन्होंने ५६ गेंदें खेली तथा नौ चौके लगाए। कोहली की ५० गेंद की पारी में चार चौके और एक छक्का शामिल है। दूसरी तरफ पहली बार वनडे में कप्तानी कर रहे एडेन मार्कराम के लिए शुरू से कुछ भी अच्छा नहीं रहा। पहले वह टास हार गए और कोहली ने उनकी टीम को बल्लेबाजी को लिए आमंत्रित किया। पिच काफी शुष्क थी और उसमें भारत के कलाईयों के दोनों स्पिनरों ने पर्याप्त टर्न हासिल किया। हाशिम अमला (२३) और क्विटंन डिकाक (२०) ने पहले विकेट के लिए ३९ रन जो़डे लेकिन दसवें ओवर में यह साझेदारी टूटने के बाद दक्षिण अफ्रीका ने लगातार विकेट गंवाए। अमला को भुवनेश्वर ने विकेट के पीछे कैच कराया। स्पिनरों के आक्रमण पर आते ही दक्षिण अफ्रीकी बल्लेबाजी की कमजोरी फिर से खुलकर सामने आ गई। उसने ५१ रन पर तीन विकेट गंवाए। डिकाक को चहल ने डीप मिडविकेट पर कैच कराया जबकि कुलदीप ने मार्कराम (आठ) को इसी तरह से कैच देने के लिए मजबूर किया। इसके चार गेंद बाद कुलदीप की तेजी से स्पिन लेती गेंद पर डेविड मिलर (शून्य) भी पवेलियन लौट गए। जेपी डुमिनी (२५) और अपना पहला वनडे मैच खेल रहे खायलिले जोंडो (२५) ने ४८ रन जो़डकर दक्षिण अफ्रीका की उम्मीद जगाई। जोंडो ने चहल पर स्लॉग स्वीप करने के प्रयास में मिडविकेट पर कैच दिया। चहल और कुलदीप के सामने दक्षिण अफ्रीका के पुछल्ले बल्लेबाज भी बगलें झांकते हुए नजर आए। क्रिस मौरिस ने आखिरी बल्लेबाज के रूप में आउट होने से पहले १४ रन बनाए। जसप्रीत बुमराह (१२ रन देकर एक) और भुवनेश्वर कुमार (१९ रन देकर एक) ने भी एक -एक विकेट लिया।

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