vasundhara raje scindia
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राजस्थान में भाजपा और कांग्रेस का इस बार मुकाबला कांटे का बताया जा रहा है लेकिन मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे सिंधिया ने राजस्थान गौरव यात्रा निकाल कर पार्टी का गौरव बढ़ाया है। सत्तारूढ़ भाजपा वसुंधरा राजे के नेतृत्व में पिछले पांच साल के कामकाज और विकास को मुद्दा बनाकर चुनाव में उतर रही है। मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे सिंधिया ने हालांकि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नाम पर ही राज्य की जनता से इस बार भी वोट मांगे हैं और राजस्थान गौरव यात्रा के दौरान इसका उल्लेख किया।

हाल में उनकी यात्रा के दौरान काले झंडे दिखाए गए और हंगामा हुआ। भाजपा के नेताओं ने इसके लिए कांग्रेस नेता और पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को जिम्मेदार ठहराया है। प्रदेश में कांग्रेस मुख्य विपक्षी दल है और 2013 के चुनाव में हालांकि भाजपा ने प्रचण्ड बहुमत से सरकार बनायी। अभी पिछले महीनों में कांग्रेस ने दो लोकसभा और एक विधानसभा के उपचुनाव में भाजपा प्रत्याशी को पराजित करके यह साबित किया कि जनता अब कांग्रेस के पक्ष में आ गयी है।

मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे यह नहीं मानती और उन्होंने कहा कि राजस्थान गौरव यात्रा के दौरान जिस तरह जनता का समर्थन मिला है उससे यही लगता कि प्रदेश में भाजपा फिर से सरकार बनाएगी। मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे सिंधिया दिवंगत भाजपा नेता राजमाता विजय राजे सिंधिया की बेटी हैं। उनका विवाह राजस्थान के धौलपुर राजघराने में हुआ है। इस तरह उन्हें राजस्थान की बहू और महारानी भी कहा जाता है।

वसुंधरा राजे ने अपना राजनीतिक जीवन भाजपा की युवा शाखा से शुरू किया था। इसके बाद वर्ष 1985 में उन्हें भाजपा ने विधानसभा चुनाव लड़ने का टिकट दिया। धौलपुर विधानसभा सीट से उन्होंने चुनाव जीता। वसुंधरा राजे ने एक विधायक के रूप में प्रभावशाली कार्य किया। इसलिए वर्ष 1989 में पार्टी ने उन्हें केन्द्र की राजनीति करने के लिए लोकसभा चुनाव लड़ने को कहा। झालावाड़ से उन्हें टिकट दिया गया और वसुंधरा राजे सांसद बन गईं।

वसुंधरा राजे ने जनता के बीच अपनी अच्छी पहचान बनायी और वर्ष 1991, 1996, 1998 और 1999 में जब राजनीतिक उथलपुथल के चलते लोकसभा के चुनाव हुए तो वसुंधरा राजे ने झालावाड़ से ही भाजपा के टिकट पर संसदीय प्रतिनिधित्व किया। भाजपा ने जब वर्ष 1998 में अटल बिहारी बाजपेयी के नेतृत्व में सरकार बनाई तो श्रीमती वसुंधरा राजे सिंधिया को विदेश राज्य मंत्री बनाया गया था।

— अशोक त्रिपाठी —

(ये लेखक के निजी विचार हैं)

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