गोल्ड कोस्ट/वार्ताभारत को बुधवार से शुरू होनेवाले २१वें गोल्ड कोस्ट राष्ट्रमंडल खेलों से पहले ’’सिरिंजगेट’’ प्रकरण से गहरा झटका लग गया था लेकिन भारतीय खिला़डी इस प्रकरण से उबरते हुए इन खेलों में शानदार प्रदर्शन करने के इरादे से उतरेंगे। भारत का २२२ सदस्यीय दल गोल्ड कोस्ट में मे़जबान ऑस्ट्रेलिया की बादशाहत को क़डी चुनौती देगा। भारत ने राष्ट्रमंडल खेलों के पिछले तीन संस्करणों में कुल २१५ पदक जीते हैं। इनमें भारत ने २००६ के मेलबोर्न राष्ट्रमंडल खेलों में ५०, वर्ष २०१० के दिल्ली राष्ट्रमंडल खेलों में सर्वाधिक १०१ और वर्ष २०१४ के ग्लास्गो राष्ट्रमंडल खेलों में ६४ पदक जीते हैं। भारत ग्लास्गो के अपने पिछले प्रदर्शन को पीछे छो़डते हुए गोल्ड कोस्ट में राष्ट्रमंडल खेलों के इतिहास में कुल ५०० पदकों का आंक़डा छूने का लक्ष्य हासिल करने उतरेगा। भारत को सबसे ज्यादा उम्मीदें कुश्ती, निशानेबाजी, भारोत्तोलन, बैडमिंटन और मुक्केबाजी से रहेंगी। ग्लास्गो में भारत के १५स्वर्ण पदकों में कुश्ती में पांच और निशानेबाजी में चार स्वर्णपदक थे। गोल्ड कोस्ट में भारत को इन खेलों की शुरुआत सेपहले एक ब़डा झटका उस समय लग गया जब भारतीय मुक्केबाजों के रिहायशी परिसर के पास सिरिंज पायी गई जोकि राष्ट्रमंडल खेल महासंघ (सीजीएफ) के नियमों का सरासरउल्लंघन है। भारतीय मुक्केबा़ज फिलहाल डोपिंग के आरोप सेबच गए हैं लेकिन यह प्रकरण भारतीय खिलाि़डयों पर खेलों कीअवधि के दौरान तलवार बनकर लटकता रहेगा। भारतीय खिलाि़डयों को इस मामले में अतिरिक्त सतर्कता बरतने के निर्देश दिए गए हैं और खुद भी भारतीय खिलाि़डयों को खासा सावधान रहना होगा कि उनके साथ किसी तरह की कोई साजिश न हो सके। इस तरह की एक भी अन्य घटना भारतीय छवि को दागदार कर सकती है। ऑस्ट्रेलिया इन मामलों में कितना सख्त है यह सभी ने बॉल टेम्परिंग प्रकरण में देख लिया है जहां उसने अपने तीन खिलाि़डयों पर प्रतिबंध लगा दिए हैं। गोल्ड कोस्ट में भारत के कई दिग्गज खिला़डी मैदान में उतर रहे हैं जिनमें से कई के लिए यह आखिरी राष्ट्रमंडल खेल भी हो सकते हैं। ओलंपिक और विश्व चैंपियनशिप की रजत पदक विजेता पीवी सिंधू को भारतीय ध्वजवाहक की जिम्मेदारी सौंपी गई है जो बुधवार को उद्घाटन समारोह में भारतीय उम्मीदों का भार लेकर दल का नेतृत्व करेंगी।सिंधू हाल में हैदराबाद में ट्रेनिंग के दौरान अपने टखने में कुछ चोट खा बैठी थी लेकिन उन्होंने उम्मीद जताई है कि वह इस चोट से ठीक होकर इन खेलों में देश की पदक दावेदारी को मजबूत करेंगी। सिंधू ने ग्लास्गो राष्ट्रमंडल खेलों में व्यक्तिगत मुकाबलों में कांस्य पदक जीता था और उसके दो वर्ष बाद रियो ओलंपिक में रजत पदक जीता था। उन्हें ब़डे खेल आयोजनों में अभी अपने पहले स्वर्ण की तलाश है।ग्लास्गो में स्वर्ण पदक जीतने वाले पहलवान सुशील कुमार, निशानेबा़ज जीतू राय, अनुभवी गगन नारंग, पांच बार की विश्व चैंपियन एमसी मैरीकॉम, भारतीय लीजेंड खिला़डी सायना नेहवाल, महिला पहलवान साक्षी मलिक, भाला फेंक एथलीट नीरज चोप़डा, बैडमिंटन खिला़डी किदाम्बी श्रीकांत, भारोत्तोलन संजीता चानू, मुक्केबा़ज मुकेश कुमार और विकास कृष्णन इन खेलों में स्वर्ण पदक के लिए प्रबल दावेदार रहेंगे।

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