cji ranjan gogoi
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नई दिल्ली। मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई ने कहा है कि अब से उच्चतम न्यायालय में जज प्री-इंस्टॉल्ड माइक सिस्टम का उपयोग करेंगे। उन्होंने बुधवार को खुली अदालत में यह बात कही। दरअसल सीजेआई गोगोई के पास ऐसी याचिका आई थी जिसमें यह अनुरोध किया गया था कि न्यायालय में माइक सिस्टम का उपयोग किया जाए। अब तक माइक के बिना जिस तरह अदालती कार्यवाही के दौरान न्यायाधीश कोई टिप्पणी करते या फैसला सुनाते तो वहां मौजूद पत्रकारों, वकीलों और कानून के छात्रों को स्थिति स्पष्ट समझने में दिक्कत आती थी।

इसके बाद सीजेआई से माइक के लिए अनुरोध किया गया जो उन्होंने स्वीकार कर लिया है। सीजेआई के इस कदम को वकीलों, पत्रकारों और सुनवाई में मौजूद वादियों ने भी सराहा है। साल के शुरुआत में उच्चतम न्यायालय में एक याचिका दाखिल कर इस बात की ओर ध्यान आकर्षित किया गया था कि माइक न होने की वजह से कैसी परिस्थितियां पैदा हो जाती हैं।

याचिका में कहा गया था कि माइक का इस्तेमाल न होना नागरिकों के संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन है। इसके अलावा यह न्याय व्यवस्था की प्रशासनिक प्रणाली में बाधक भी है। कई गंभीर मामलों की सुनवाई के दौरान न्यायालय में मौजूद पत्रकारों को माइक के अभाव में स्पष्ट जानकारी नहीं मिल पाती थी। इसलिए वे गलत जानकारी नोट कर लेते जिससे बाद में भारी समस्या पैदा हो जाती है।

न्यायालय में कानून के छात्र भी मौजूद रहते हैं, जो अपने ज्ञान में वृद्धि के लिए मुकदमे से जुड़ी बातों को समझने की कोशिश करते हैं। अगर न्यायालय में माइक का इस्तेमाल किया जाए तो उनके लिए आसानी होगी। साथ ही माइक न होने की सूरत में उनके करियर पर होने वाले प्रभाव के बारे में बताया गया।

इसके अलावा याचिका में डिजिटल मीडिया के बारे में बताया गया, जिसका प्रसार पूरे देश में होता जा रहा है। जब कभी न्यायालय की कोई टिप्पणी या आदेश वहां मौजूद पत्रकार के पास स्पष्ट नहीं पहुंच पाती और वह गलत जानकारी भेज देता है, तो ऐसी स्थिति में वही जानकारी वेबसाइट पर प्रकाशित हो जाती है। इसके बाद वह सोशल मीडिया पर आकर गलत तथ्यों को बढ़ावा दे सकती है। साथ ही उसके कई नुकसान हो सकते हैं।

यह याचिका कपिलदीप अग्रवाल, कुमार शानू और पारस जैन ने डाली थी। याचिकाकर्ताओं ने तत्कालीन सीजेआई दीपक मिश्रा से मांग की थी कि न्यायालय में माइक का इस्तेमाल किया जाए। उन्होंने सूचना का अधिकार के जरिए यह जानकारी हासिल की थी कि उच्चतम न्यायालय में प्री-स्टॉल्ड माइक सिस्टम बदलने पर करीब 91 लाख रुपए व्यय हो गए थे। इस पहल के बाद उम्मीद जताई जा रही है कि न्यायालय में वकीलों, कानून के छात्रों और मीडिया के लिए काफी आसानी होगी।

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