lord ganesha
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बेंगलूरु। भगवान गणपति को हर शुभ कार्य के प्रारंभ में पूजा जाता है। वे विघ्नों का हरण करते हैं। उनका मुख अत्यंत सुंदर और शुभ गुणों से युक्त है। इसलिए उनके दर्शन से मन को प्रसन्नता प्राप्त होती है। गणपति के अनेक नाम हैं और प्रत्येक नाम के जाप का विशेष महत्व है। इसी प्रकार गणपति के शरीर की आकृति भी उन्हें दूसरे देवों से अलग बनाती है। उनके बड़े कान हमें शुभ वचन सुनने की प्रेरणा देते हैं, वहीं हाथ में मोदक समृद्धि का प्रतीक है।

गणपति की छोटी आंखें हमें प्रेरणा देती हैं कि हम सूक्ष्मदर्शी बनें, क्योंकि कई बार सफलता का रहस्य बहुत मामूली लगने वाली बातों में ही समाया होता है। इनके अलावा गणपति के दर्शन से जुड़ी एक बात आपको चकित कर सकती है। ऐसी मान्यता है कि गणपति की पीठ के दर्शन नहीं करने चाहिए। ऐसा क्यों? इसके पीछे कई कारण गिनाए जाते हैं।

मान्यता है कि गणपति की पीठ के दर्शन करने से दरिद्रता की प्राप्ति होती है। अगर कोई व्यक्ति पीठ के दर्शन करता है तो उसे शुभ नहीं माना जाता। धार्मिक मान्यता है कि गणपति के हर अंग में अलग-अलग चीजों का वास है। उनके मस्तक में ब्रह्मलोक वास करता है तो चरणों में सप्तलोक।

इसी प्रकार उनकी सूंड में धर्म का वास होता है। गणपति दाएं हाथ से हमें वरदान देते हैं। इसमें हम सबके लिए कल्याण का वरदान है। उनके मोटे पेट में सुख-समृद्धि का वास माना जाता है। उनका बायां हाथ अन्न का भंडार माना जाता है। उनके कानों में वेदों का दिव्य ज्ञान समाया है।

गणपति की नाभि में ब्रह्मांड का वास है। जो भी व्यक्ति इनके दर्शन करता है, उसे इनका वरदान प्राप्त होता है। यदि कोई भूलवश पीठ के दर्शन कर ले तो उसे पुन: भगवान के मुख के दर्शन कर लेने चाहिए। गणपति के मुख से दर्शन से मन को एक विशेष प्रकार की प्रसन्नता और शांति की प्राप्ति होती है।

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