asaduddin owaisi
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नई दिल्ली। दिल्ली उच्च न्यायालय में वकील विष्णु नारायण जैन ने जनहित याचिका दायर की है कि लोकसभा सांसद असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुसलमीन (एआईएमआईएम) का रजिस्ट्रेशन रद्द किया जाए। अब उच्च न्यायालय ने ओवैसी और चुनाव आयोग को नोटिस जारी किया है। विष्णु नारायण जैन ने तर्क दिया है कि ओवैसी की पार्टी भारत के संविधान में निहित धर्मनिरपेक्षता के सिद्धांतों का उल्लंघन करती है।

याचिका में कहा गया है कि एआईएमआईएम के नेता वोट पाने के लिए बहुत भड़काऊ और नफरत भरी भाषा का इस्तेमाल करते हैं। उन्होंने इसे संविधान के जनप्रतिनिधि एक्ट 1951 का उल्लंघन बताया है। अब एआईएमआईएम को दिल्ली उच्च न्यायालय में अपना पक्ष रखना होगा। इस मामले की अगली सुनवाई 3 दिसंबर को होगी।

इस याचिका में कहा गया है कि एआईएमआईएम के नेताओं द्वारा हिंदू धर्म के देवी-देवताओं के लिए अभद्र शब्दों का इस्तेमाल किया गया है। विष्णु नारायण जैन ने उच्चतम न्यायालय के उस आदेश का हवाला भी दिया जिसके तहत धर्म के आधार पर वोट मांगना मना है। उन्होंने याचिका में कहा है कि यदि ओवैसी की पार्टी का रजिस्ट्रेशन रद्द नहीं हुआ तो यह देश में एक और बंटवारे की वजह बन सकती है। उन्होंने आरोप लगाया है कि एआईएमआईएम भी उसी मुस्लिम लीग की कार्बन कॉपी है जिसने देश का बंटवारा करवाया था।

गौरतलब है कि एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी अक्सर अपने विवादित बयानों के लिए मीडिया की सुर्खियों में रहते हैं। एक वीडियो में उनके छोटे भाई अकबरुद्दीन हिंदू देवी-देवताओं के लिए अभद्र भाषा का इस्तेमाल करते दिखे थे। उसके बाद काफी विवाद हुआ। उनके अलावा भी ओवैसी कई बार ऐसे बयान दे चुके हैं जिससे उन पर ऐसी भाषा का इस्तेमाल करने के आरोप लगे हैं जो देश के सद्भाव के लिए ठीक नहीं है।

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