delhi cm arvind kejriwal
delhi cm arvind kejriwal

नई दिल्ली। लोकसभा चुनाव ज्यादा दूर नहीं हैं और पक्ष-विपक्ष अपनी रणनीति में जुटा है। विपक्ष के नेता मोदी के विजयरथ को रोकने के लिए कई बार महागठबंधन का जिक्र कर चुके हैं। अब विपक्ष के एक संभावित दल ने इससे किनारा कर लिया है। आम आदमी पार्टी संयोजक अरविंद केजरीवाल ने कहा है कि वे 2019 में मोदी के खिलाफ बनने वाले महागठबंधन का हिस्सा नहीं होंगे। यह विपक्ष के लिए किसी तगड़े झटके से कम नहीं है, क्योंकि अब तक यह तय माना जा रहा था कि ‘आप’ इस महागठबंधन का हिस्सा होगी।

केजरीवाल ने हरियाणा के रोहतक में कहा कि जो पार्टियां इस संभावित महागठबंधन में सम्मिलित होने जा रही हैं, उनकी देश के विकास में कोई भूमिका नहीं रही है। इसके बाद विपक्ष के नेता हैरान हैं, क्योंकि केजरीवाल जिस तरह मोदी का विरोध करते आए हैं, उसके बाद यह माना जा रहा था कि उनकी पार्टी महागठबंधन का हिस्सा बनकर आगामी लोकसभा चुनावों में उतरेगी।

अरविंद केजरीवाल के इस फैसले से विपक्ष के महागठबंधन पर कई सवाल उठने लगे हैं। साथ ही विपक्ष की एकता की असलियत सामने आ रही है। इससे पहले जब एचडी कुमारस्वामी ने कर्नाटक के मुख्यमंत्री पद की शपथ ली तो केजरीवाल भी समारोह में शामिल हुए। इससे संदेश गया कि केजरीवाल मोदी के खिलाफ बनने वाले विपक्ष के महागठबंधन में शामिल हो सकते हैं। अब उनका यह रुख विपक्ष के सामने चुनौतियां बढ़ा सकता है।

वैसे राजनीतिक विश्लेष्कों का मानना है कि केजरीवाल ने यह फैसला भावी राजनीतिक परिदृश्य को ध्यान में रखकर लिया है। चूंकि विपक्ष समस्याएं तो खूब गिना रहा है लेकिन यह नहीं बता रहा कि जब वह सत्ता में था तो क्या किया और यदि दोबारा सत्ता में आने में कामयाब हुआ तो कैसे उन्हें हल करेगा। विपक्ष का विरोध ​’मोदी हटाओ’ तक ही सीमित लगता है।

यदि इस स्थिति में केजरीवाल महागठबंधन का हिस्सा बनेंगे तो उनकी पार्टी को भविष्य में नुकसान हो सकता है, क्योंकि वे व्यवस्था परिवर्तन के नाम पर सत्ता में आए थे और जनता ने उन्हें अपार बहुमत दिया। इसके अलावा ‘आप’ पंजाब, हरियाणा और राजस्थान पर ध्यान देना चाहती है। अगर वह विपक्ष के साथ मिली तो अतीत में उसकी खामियों का नतीजा भुगतना पड़ सकता है। इसलिए ‘आप’ ऐसा कोई जोखिम नहीं लेना चाहती और स्वयं के बूते ही चुनाव लड़ना चाहती है।

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