नई दिल्ली। उच्चतम न्यायालय ने मंगलवार को स्पष्ट किया कि असम में राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (एनआरसी) को अंतिम रूप देकर इसके प्रकाशन के लिए चल रहा काम इस साल ३१ मई तक पूरा करना ही होगा और यह काम किसी भी प्रकार की दखलंदाजी के बगैर ही जारी रहना चाहिए। न्यायमूर्ति रंजन गोगोई और न्यायमूर्ति आरएफ नरिमन की पीठ ने इस प्रक्रिया को ३१ मई की बजाय ३१ जुलाई तक पूरा करने के केन्द्र सरकार और राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर के राज्य संयोजक के आग्रह पर असहमति व्यक्त करते हुए टिप्पणी की, आप इस कार्य को आगे ब़ढाएं। यह रजिस्टर असम में गैरकानूनी प्रवासियों की पहचान के लिए तैयार किया जा रहा है। केन्द्र की ओर से अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने पीठ से कहा कि राज्य संयोजक ने सीलबंद लिफाफे में प्रगति रिपोर्ट सौंपी है जिसके अनुसार करीब एक करो़ड नागरिकों का अभी सत्यापन करना है और इस समय काम कर रहे लोगों के अनुसार यह ३१ जुलाई तक हो जाएगा। पीठ ने जब राज्य संयोजक प्रतीक हजेला से इस बारे में पूछा तो उन्होंने कहा कि सत्यापन की प्रक्रिया घर-घर जाने से जु़डी हुई है जो ३१ मई तक पूरी होने की उम्मीद है और इसके बाद सारी कार्यवाही समेटने के लिए ३० जून तक एक महीने के समय की आवश्यकता होगी। पीठ ने हजेला से कहा, आप इसे आगे ब़ढाएं। हम इसे पीछे ढकेलने नहीं जा रहे। साथ ही यह भी कहा, इसे ३१ मई तक पूरा कीजिए, इसके एक दिन बाद भी नहीं। वेणुगोपाल ने जब न्यायालय से उनके अनुरोध पर विचार करने का आग्रह किया और कहा कि राज्य सरकार इस मामले मे अपना सर्वश्रेष्ठ काम कर रही है तो पीठ ने कहा, सिर्फ पीठ ही अपना सर्वश्रेष्ठ कर रही है, बाकी कोई नहीं। इसके साथ ही पीठ ने अपने आदेश में यह भी जो़ड दिया कि संयोजक के अनुसार राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर का अंतिम मसौदा ३० जून तक पूरा हो जाएगा और असम में मार्च और अप्रैल में पंचायत और स्थानीय निकायों के प्रस्तावित चुनावों का भी जिक्र किया।अटॉर्नी जनरल ने कहा कि संयोजक के अनुसार वे नागरिकों की पिछली पीि़ढयों की भी जांच कर रहे हैं जो व्यावहारिक रूप से असंभव है। इस पर पीठ ने कहा, अटॉर्नी जनरल जी, जिसे सभी ने महज एक ब़डा मजाक समझा था, उसे हकीकत में तब्दील कर दिया गया है। हमारा काम असंभव को संभव बनाना है और हम यह करेंगे। हम पिछले चार साल से इसकी निगरानी कर रहे हैं और हम यह सब जानते हैं। पीठ ने कहा कि वह ३० दिन बाद रजिस्टर के काम की प्रगति का अवलोकन करेगी। पीठ ने कहा, वस्तुस्थिति से अवगत कराने के लिए धन्यवाद और यह कहने के लिए भी धन्यवाद कि हम इससे अनभिज्ञ थे। ऐसी अनेक चीजें हैं जिनके बारे में हम जानते हैं परंतु हम कहते हैं कि हमें पता नहीं है।

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