बेंगलूरु। समाज के दलितों और पिछ़डों के विकास के वादे निभाने में कांग्रेस और भाजपा पूरी तरह से नाकाम रही है। अब इन वर्गों को दोनों राष्ट्रीय पार्टियों के बजाय किसी क्षेत्रीय दल की सरकार चुननी चाहिए्। उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री और बहुजन समाज पार्टी (बसपा) सुप्रीमो मायावती ने शनिवार को यहां एक चुनाव प्रचार रैली को संबोधित करते हुए यह बात कही। उन्होंने मतदाताओं का आह्वान किया कि आगामी राज्य विधानसभा चुनाव में कांग्रेस और भाजपा को हार का स्वाद चखाया जाए्। यह चुनावी रैली जनता दल (एस) ने आयोजित की थी। पूर्व प्रधानमंत्री एचडी देवेगौ़डा की अगुवाई वाली यह पार्टी आगामी चुनाव बसपा के साथ तालमेल बनाकर ल़डने जा रही है। मायावती ने रैली को संबोधित करते हुए दावा किया कि भाजपा और कांग्रेस ने कभी अपने ही चुनावी वादों पर खरा उतरने के लिए अनुसूचित जाति और जनजाति समुदायों के विकास के लिए अपने एजेंडे पर भी काम नहीं किया। नतीजा यह है कि दलितों में बेरोजगारी की दर लगातार ब़ढती जा रही है। भाजपा चाहती है कि इन समुदायों के युवा बेरोजगार पकौ़डे बेचें। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इस बयान ने पिछ़डे और दलित समुदायों को बेहद निराश कर दिया है। अन्य पिछ़डा वर्ग के लोगों में भी प्रधानमंत्री के बयान से रोष है। मायावती ने कहा कि भाजपा और कांग्रेस ने अब तक दलितों, पिछ़डों और अन्य पिछ़डे वर्गों के सदस्यों के साथ ही मुस्लिमों को अपने वोट बैंक से अधिक कुछ नहीं माना। अब कर्नाटक के मतदाताओं के सामने मौका है कि वह किसी तीसरी ताकत की सरकार को यहां की सत्ता सौंपें। उन्होंने कहा कि आज देश में हिंदुत्व का एजेंडा ही सबसे ब़डा मुद्दा बन चुका है और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार दलितों के विकास की मांगों पर पूरी तरह से उदासीन बनी हुई है। वहीं, कर्नाटक की सिद्दरामैया सरकार ने भी राज्य में दलितों के उत्थान और विकास के लिए कोई खास कार्यक्रम क्रियान्वित नहीं किया है। उन्होंने कहा, ’’मैं यहां एक बार फिर से मंडल आयोग का मुद्दा उठाना चाहूंगी। मैं पूछती हूं कि कांग्रेस और भाजपा इस मुद्दे को क्यों भूल गई? यह दलितों और पिछ़डों का अपमान है और मैं चाहती हूं कि यह समुदाय इस मुद्दे पर पूरी एकजुटता के साथ अपनी आवाज उठाएं्। मैं पूछती हूं कि कर्नाटक में काफी ताकतवर होने के बावजूद कांग्रेस ने यहां किसी दलित को मुख्यमंत्री क्यों नहीं बनाया?’’मायावती ने कहा कि उनकी पार्टी ने जनता दल (एस) के साथ चुनाव पूर्व समझौते के तहत दोनों राष्ट्रीय पार्टियों को हार का स्वाद चखाने के लिए चुनाव मैदान में उतरेगी। कर्नाटक में बदलाव का वक्त आ चुका है। राज्य को एचडी कुमारस्वामी की अगुवाई में जनता दल (एस) की सरकार की जरूरत है।

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