बेंगलूरु/दक्षिण भारतकर्नाटक विधानसभा के चुनावी अभियान में जुबानी जंग के बाद अब मामला माफी मांगने और अदालत में देख लेने तक पहुंच गया है। कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्दरामैया ने भारतीय जनता पार्टी और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से चुनाव प्रचार के दौरान उनके खिलाफ अपमानजनक टिप्पणियां करने को लेकर उनसे सार्वजनिक माफी मांगने को कहा है। सिद्दरामैया ने कहा कि मोदी और भाजपा ने प्रिंट और टेलीविजन चैनलों में विज्ञापनों तथा चुनावी प्रचार के दौरान आपत्तिजनक टिप्पणियां कीं। उन्होंने कहा कि माफी न मांगने की स्थिति में वह सौ करो़ड रुपए की मानहानि का कानूनी मामला शुरू करेंगे। उन्होंने अपने वकील के माध्यम से मोदी और भाजपा को नोटिस भी जारी किया है जिसकी प्रति यहां प्रेस को भी सोमवार को जारी की गयी। सिद्दरामैया के वकील और कांग्रेस प्रवक्ता वीएस उग्रप्पा ने कहा कि नोटिस में कहा गया है कि प्रधानमंत्री ने लगातार कई अपमानजनक टिप्पणियां की और अपने भाषणों में झूठ बोला कि, कर्नाटक की सरकार १० प्रतिशत की सरकार है। प्रधानमंत्री ने कर्नाटक सरकार पर हत्याएं करवाने में लिप्त होने जैसे गंभीर आरोप भी लगाये। मोदी ने मैसूरु के दावणगेरे में अपने चुनावी भाषण में तो सिद्दरामैया सरकार को ’’सीधा रुपैया सरकार’’ घोषित किया और गुलबर्गा, बेल्लारी और बेंगलूरु की जनसभाओं में भी इसे दोहराया। नोटिस में भ्रष्टाचार के कई अन्य आरोपों का भी जिक्र है। उग्रप्पा ने कहा कि सभी आरोप गलत हैं और सिद्दरामैया और उनकी राजनीतिक पार्टी की छवि को बिगा़डने को लेकर राजनीतिक उद्देश्यों से प्रेरित हैं। इस बयान ने उनके रिश्तेदारों और उन शुभचिंतकों का ध्यान काफी खींचा है जिन्हें लेकर सिद्दरामैया से यह स्पष्ट करने को कहा गया था कि ये बयान बिना सत्यापित किए ही प्रचारित कर दिये गये। ऐसे बयान उनकी प्रतिष्ठा को बुरी तरह प्रभावित करने के अलावा पूरी तरह गलत, आक्रामक और अपमानजनक हैं। नोटिस में यह भी कहा गया है, ये अनियमित हरकतें हैं, जो गैर पेशेवर आचरण या बेईमानी से भरी है जो सार्वजनिक जीवन में समर्थकों के बीच न सिर्फ उनकी प्रतिष्ठा को आघात पहुंचाएंगी, बल्कि सरकारी अधिकारियों, बौद्धिक वर्ग और उनके चाहने वालों के बीच उनकी छवि खराब करने के अलावा उन्हें मानसिक रूप से भी तकलीफ पहुंचाएंगी। बयान में यह भी कहा गया है कि प्रधानमंत्री और भाजपा को ओर से की गयी टिप्पणियां भारतीय दंड संहिता की कई धाराओं के तहत आपराधिक रूप से दंडनीय हैं। इसे लेकर सार्वजनिक रूप से माफी न मांगने की स्थिति में कानूनी प्रावधान के तहत कार्यवाही शुरू की जाएगी और १०० करोड रुपए की क्षतिपूर्ति का दावा किया जाएगा।

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