कलियुग में पुण्य प्राप्ति के साधन के रूप में मौजूद है गाय: मलूकपीठाधीश्वरजी

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तिरुपति/दक्षिण भारत। गोधाम महातीर्थ पथमेड़ा न्यास शाखा दक्षिण भारत द्वारा तिरुमला तिरुपति धाम में आयोजित बालाजी चातुर्मास गोमंगल महोत्सव में पीवी मठ में चातुर्मासार्थ विराजित पथमेड़ा धाम के आदिसंस्थापक गोऋषि स्वामीश्री दत्तशरणानंदजी महाराज के सान्निध्य में विष्णु पुराण कथा का वर्णन करते हुए कथा वाचक जगतगुरु मलूकपीठाधीश्वर राजेंद्रदास देवाचार्यजी ने गोमाता के महत्त्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि गोमाता एवं भारत माता के प्रति भक्ति, सेवा एवं कार्य का भाव जिनके हृदय में नहीं है वह किसी भी प्रकार से राष्ट्र, समाज एवं प्राणीमात्र के लिए हितकर नहीं हो सकते हैं।

उन्होंने कहा, हमारे धर्म की मां पूज्या गोमाता ही है एवं धर्म की हजारों वर्ष की तपस्या के फलस्वरूप भगवान शिव ने उन्हें वृषभ रूप में अपने वाहन के रूप में स्वीकार किया। हमारी सनातन संस्कृति में भगवान कृष्ण, भगवान शंकर, आदिगुरु भगवान दत्तात्रेय सहित अनेक ऐसे अवतार हैं जिनकी गाय के बगैर छवि की कल्पना भी नहीं की जा सकती है।

कथा वाचक ने गाय की कथा सुनाते हुए कहा कि जब प्रलय का समय आया एवं धरती रसातल में जा रही थी तब इस सृष्टि के रचयिता ब्रह्माजी ने सभी देवों से आग्रह किया कि इस सृष्टि की रक्षा करें, तब भी किसी के द्वारा यह कार्य नहीं करने पर वेदलक्षणा गोमाता ने ही अपने सींगों पर पृथ्वी को धारण कर इस सृष्टि को बचाया।

ऐसी पूजनीय, वन्दनीय, सर्वशक्तिमान जगतजननी गौमाता की रक्षा के लिए हमें अपना सर्वस्व लगा देना चाहिए। यह तो हम सभी प्राणियों को कलियुग के इस काल में पुण्य प्राप्ति के साधन के रूप में साधन प्रदान करने हेतु गोमाता अपनी लीला कर रही है। हम सभी को इस अवसर का लाभ लेकर गौसेवा में जुट कर अपने मानव जन्म को सार्थक करना चाहिए।

गो मंगल महोत्सव में पूनीदेवी धूंखाजी राजपुरोहित परिवार के सौजन्य से कृष्ण जन्माष्टमी के मौके पर सपरिवार गौपूजन किया एवं रात्रिकालीन कृष्ण जन्मोत्सव के अवसर पर भगवान कृष्ण जन्म की सुंदर झांकियां प्रदर्शित की गईं। विठ्ठलकृष्णजी ने सुमधुर भजनों व संकीर्तन की प्रस्तुति देकर समस्त उपस्थित भक्तों को जन्मोत्सव में आनन्दित कर दिया। कथा यजमान हरिशंकर, सुखराज रेवतड़ा ने सपत्नीक व्यासपीठ पूजन एवं आरती संपादित की। कार्यक्रम का संचालन आलोक सिंहल ने किया।

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