बेंगलूरु/दक्षिण भारतपूर्व प्रधानमंत्री एचडी देवेगौ़डा के नेतृत्व में जनता दल (एस) और कांग्रेस के नेता गुलाम नबी आजाद, अशोक गहलोत, केसी वेणुगोपाल आदि ने गुरुवार को राज्यपाल वजूभाई वाला द्वारा विधानसभा चुनाव के बाद राज्य की सबसे ब़डी पार्टी के रूप में उभरी भाजपा को सरकार गठित करने का आमंत्रण देने के फैसले के खिलाफ विरोध प्रकट किया।विधानसौधा परिसर में स्थित महात्मा गांधी की प्रतिमा के सामने यह सांकेतिक प्रदर्शन चार घंटों तक जारी रहा। इसके बाद कांग्रेस के विधानयक शहर के बाहरी हिस्से में स्थित ईगलटन रिसॉर्ट में लौट गए, जबकि जनता दल (एस) के नेता शहर के एक पांच सितारा होटल वापस चले गए्। कांग्रेस के सूत्रों ने बताया कि दोनों पार्टियों के नेता अपनी आगामी रणनीति तय करने के लिए जल्दी ही एक बैठक करने वाले हैं। गुरुवार को विधानसौधा में राज्यपाल वाला के निर्णय के विरोध में इनके प्रदर्शन के दौरान अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (एआईसीसी) के वरिष्ठ नेता गुलाम नबी आजाद और अशोक गहलोत के साथ ही कर्नाटक प्रदेश कांग्रेस कमेटी (केपीसीसी) के अध्यक्ष डॉ. जी. परमेश्वर, जनता दल (एस) के राष्ट्रीय अध्यक्ष एचडी देवेगौ़डा, इसके प्रदेश अध्यक्ष एचडी कुमारस्वामी, पूर्व मुख्यमंत्री सिद्दरामैया और अन्य लोग मौजूद थे। इन सबने राज्यपाल के फैसले के विरोध स्वरूप अपनी बांहों में काली पट्टियां बांध रखी थीं। महात्मा गांधी की प्रतिमा के सामने धरने पर बैठे इन नेताओं ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुवाई वाली केंद्र सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए न्याय की मांग की। कुमारस्वामी ने अपनी ल़डाई में सभी पार्टियों के नेताओं से सहयोग देने की अपील की। उन्होंने राज्यपाल के निर्णय को लोकतंत्र पर हमला मानते हुए देश के संविधान की रक्षा का आह्वान किया। उन्होंने कहा, ’’मैं पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती की अगुवाई वाली बहुजन समाज पार्टी सहित सभी राज्यों के विपक्षी दलों के नेताओं को पत्र लिखकर राज्यपाल के कदम की तीखी निंदा करने और संविधान के मूल्यों को बरकरार रखने के लिए पत्र लिख रहा हूं्।’’ उन्होंने आरोप लगाया कि उन्हें कांग्रेस विधायक आनंद सिंह को मोदी सरकार की ओर से प्रवर्तन निदेशालय के छापों की धमकी दिए जाने की सूचना मिली है। भाजपा चाहती है कि आनंद सिंह राज्य की सरकार बनाने के लिए भाजपा को अपना समर्थन दें्। उन्होंने कहा, ’’कांग्रेस के टिकट पर चुनाव जीत चुके विधायक आनंद सिंह को भाजपा का समर्थन नहीं करने कीे स्थिति में प्रवर्तन निदेशालय यानी ईडी के छापों का सामना करने की धमकी दी गई है।’’इससे पूर्व बुधवार को इन दोनों पार्टियों ने राज्यपाल वजूभाई वाला से मिलकर अपने पास बहुमत होने का दावा करते हुए सरकार बनाने के लिए आमंत्रित करने की मांग की थी। इनका कहना है कि संयुक्त रूप से इनके पास ११७ विधायकों का समर्थन है, जबकि भाजपा के पास सिर्फ १०४ विधायकों की ताकत है। इन पार्टियों ने आशंका जताई कि विधानसभा में अपना बहुमत साबित करने के लिए भाजपा इनके विधायकों को तो़डने की कोशिश कर सकती है। कुमारस्वामी ने पहले ही अपनी पार्टी के विधायकों को खरीदने के लिए भाजपा की ओर से १०० करो़ड रुपए देने की पेशकश का भी दावा किया।

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