बेंगलूरु/दक्षिण भारतदक्षिण भारत कर्नाटक राज्य की राजनीति में वर्तमान समय में एक अहम मो़ड आ गया है। ७५ वर्षीय बीएस येड्डीयुरप्पा ने प्रदेश के नए मुख्यमंत्री के तौर पर शपथ ले ली है। वहीं, कांग्रेस-जद (एस) गठबंधन इस राजनीतिक ल़डाई को कानूनी रूप दे चुकी है। भाजपा राज्य में सबसे ब़डा दल होने का दावा पेश कर सत्ता की सी़ढी च़ढ गई। तो उधर बहुमत का दावा करने वाली कांग्रेस और किंगमेकर जनता दल सेक्युलर (एस) सत्ता की इस दौ़ड में पिछ़डती चली गई। भाजपा की इस जीत में सबसे ब़डा चेहरा बनकर उभरे बीएस येड्डीयुरप्पा पहले भी कर्नाटक के मुख्यमंत्री रह चुके हैं। वर्ष २००८ में दक्षिण भारत में पहली बार भाजपा सरकार बनी थी तब भी बीएस येड्डीयुरप्पा ही मुख्यमंत्री बनकर आए थे। नए मुख्यमंत्री येड्डीयुरप्पा के जीवन की कहानी भी बेहद दिलचस्प है। मंड्या जिले के बुकानाकेरे के लिंगायत परिवार में २७ फरवरी १९४३ को जन्मे येड्डीयुरप्पा ने वर्ष १९६५ में क्लर्क की नौकरी से जीवन की शुरुआत की थी। सोशल वेलफेयर डिपार्टमेंट में बतौर फर्स्ट डिवीजन क्लर्क येड्डीयुरप्पा ने हालांकि कुछ समय बाद ही यहां से नौकरी छो़ड दी थी। इसके बाद शिकारीपुरा पहुंच कर राइस मिल में भी बतौर क्लर्क ही नौकरी की। द्बय्यध्·र्ैं ·र्ैंर्‍ द्धष्ठट्टर्‍ फ्ष्ठ ब्र्‍ ·र्ैंर्‍ प्रय्य्ख्रर्‍येड्डीयुरप्पा ने प़ढाई पूरी करने के बाद काम की तलाश शुरू की। एक मित्र की मदद से ही उन्हें फर्स्ट डिवीजन क्लर्क की नौकरी मिली, लेकिन नौकरी छो़डने के बाद फिर इस दोस्त ने येड्डीयुरप्पा की मुलाकात वीरभद्र शास्त्री से कराई। शास्त्री वही शख्स थे, जिनकी राइस मिल में येड्डीयुरप्पा ने दूसरी नौकरी शुरु की। शास्त्री ने येड्डीयुरप्पा को नौकरी पर रख लिया साथ ही उनकी काबिलियत को देखते हुए उन्हें आगे ब़ढने का मौका दिया। वीरभद्र शास्त्री ने ही येड्डीयुरप्पा की लग्न और मेहनत को देखते हुए अपनी बेटी मित्रा देवी से उनकी शादी करा दी। हालांकि, वर्ष २००४ में मित्रा देवी का निधन हो गया। द्बब्ज् ु्रु्रु र्ङैंझ्ॅ ्यद्बध्त्रय् त्र्य् प्ष्ठत्रद्ममात्र ४ वर्ष की उम्र में अपनी मां को खोने वाले येड्डीयुरप्पा के सिर से जल्दी पिता का साया भी उठ गया। मुश्किल भरे शुरुआती जीवन को उन्होंने अपने चाचा के साथ गुजारा। ग्रेजुएशन की प़ढाई के दौरान वह शेषाद्रिपुरम कॉलेज में इवनिंग क्लास करते थे और दिन में एक स्थानीय प्राइवेट कंपनी में ३०० रुपए प्रति महीने की जॉब करते थे।येड्डीयुरप्पा की लाइफ का टर्निंग प्वाइंट उनकी शादी थी। हालांकि शादी से पहले से ही येड्डीयुरप्पा संघ से जु़डे थे। लेकिन, शादी के २ वर्ष बाद उन्हें राजनीति में आने का मौका मिला जिसके लिए मित्रा देवी के पिता वीरभद्र शास्त्री ने उन्हें सबसे ज्यादा प्रोत्साहित किया। शादी हो चुकी थी और राजनीति में भी कदम रखा जा चुका था। लेकिन, आर्थिक स्थिति को मजबूत बनाने के लिए जरूरी था कि कुछ और भी किया जाए। इसलिए येड्डीयुरप्पा ने शिव्वमोग्गा में एक हार्डवेयर की दुकान खोली। प्प्तश्च ु्रु्रुें द्बष्ठ्र द्धख्रध् ध्र्‍ त्र्र्‍ द्मय्द्ब ·र्ैंर्‍ डझ्ष्ठ्यध्ैंख्येड्डीयुरप्पा को धार्मिक माना जाता है। पूजा-पाठ में उनकी गहरी आस्था है। इस बार भी कर्नाटक चुनाव की वोटिंग से पहले उन्होंने पूजा की और उसके बाद ही वोट डालने निकले। अपनी इसी धार्मिक प्रवृति के चलते उन्होंने वर्ष २००७ में एक ज्योतिषी के कहने पर अपने नाम की स्पेलिंग बदली थी। पहले वह अपने नाम को अंग्रेजी में धशवर्ळूीीरिरि लिखते थे और बाद में बदलकर धशवर्वूीीरिरि किया। ज्योतिषी के कहने पर उन्होंने अपने नाम में एक अतिरिक्त डी और वाई को जो़डा और आई को हटा दिया।फ्र्ड्डैंय्द्यर्‍ फ्रूट्ट ब्स् झ्ब्घ्य्द्मयेड्डीयुरप्पा का पसंदीदा पहनावा सफारी सूट है। माना जाता है कि येड्डीयुरप्पा अपने ड्रेस कोड को लेकर बहुत संवेदनशील हैं। वर्ष १९८३ में पहली बार विधायक बनने के बाद उन्होंने हल्के रंग का सफारी सूट पहनना शुरू किया था। तब से आज तक सार्वजनिक जीवन में उन्होंने कोई और कप़डा नहीं पहना। वर्ष २००८ में पहली बार येड्डीयुरप्पा भाजपा की ओर से मुख्यमंत्री चुनकर आए। लेकिन, वर्ष २०११ में भ्रष्टाचार के आरोपों के चलते उन्हें कुर्सी गंवानी प़डी। लिंगायत परिवार में जन्में येड्डीयुरप्पा के लिए कर्नाटक में यह ब़डा फैक्टर है। यही वजह है कि येड्डीयुरप्पा के बिना भाजपा के लिए कर्नाटक में अपनी पैंठ बनाना मुश्किल था। शायद इसलिए भ्रष्टाचार के आरोपों में घिरे येड्डीयुरप्पा को उन्होंने फिर से मुख्यमंत्री के तौर पर प्रोजेक्ट किया।

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