कम खाना, गम खाना तथा नम जाना है स्वस्थ जीवन का सूत्र

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बेंगलूरु/दक्षिण भारत। यहां तेरापंथ सभा यशवंतपुर के तत्वावधान में चातुर्मासार्थ विराजित मुनिश्री रणजीतकुमारजी व रमेशकुमारजी की निश्रा में शुक्रवार को यशवंतपुर स्थित मेवाड़ भवन में पर्युषण पर्व प्रारंभ हुआ। पर्युषण पर्व के पहले दिन को खाद्य संयम दिवस के रुप में मनाया गया। मुनिश्री रणजीतकुमारजी ने कहा कि आत्मशुद्धि करने का यह पर्व है।

जैन धर्म विश्व का प्राचीनतम धर्म है। समय प्रवाह की दृष्टि से भी जैन धर्म का अपना वर्चस्व रहा है। जैन धर्म समय को कालचक्र के रूप में दो विभाग करता है। उत्सर्पिणी काल और अवसर्पिणी काल। वर्तमान में अवसर्पिणी (ह्रास काल) का पांचवा आरा चल रहा है। पर्युषण पर्व का आगमिक आधार बताते हुए मुनि रमेशकुमारजी ने कहा कि अध्यात्मिक उन्नत भावनाओं का पर्व है पर्युषण।

जिन-जिन गुणों से हमारी आत्मा का विकास होता है उनकी भावना वृद्धि का, साधना का, आराधना का प्रेक्षा और अनुप्रेक्षा का प्रेरक पर्व है पर्युषण। आत्मा में स्थिर होकर अपनी वृत्तियों की शोधन करें। कषाय का उपशमन करने का प्रयास करें तभी पर्युषण पर्व मनाने की सार्थकता है।

devotees listening pravachan
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रमेशकुमारजी ने कहा कि स्वस्थ जीवन का सूत्र है कम खाना, गम खाना और नम जाना। यह तीन चीजें जो व्यक्ति अपना लेता है वह तन-मन से स्वस्थ रह सकता है। साधना और स्वास्थ्य दोनों दृष्टियों से खाद्य संयम का महत्व है। वर्तमान युग में खाने के अविवेक और असंयम के कारण भी अनेक बीमारियां आदमी को घेर लेती है।

इससे पूर्व तेरापंथ सभा यशवंतपुर के अध्यक्ष प्रकाशचंद बाबेल ने सभी का स्वागत किया। सभा के मंत्री गौतम मुथा, महिला मंडल की अध्यक्षा अरुणा महनोत ने प्रासंगिक भावों की अभिव्यक्ति दी। इस मौके पर आचार्यश्री महाश्रमण चातुर्मास व्यवस्था समिति के अध्यक्ष मूलचन्द नाहर, अखिल भारतीय तेरापंथ युवक परिषद के अध्यक्ष विमल कटारिया आदि उपस्थित थे। सभा के उपाध्यक्ष मदनलाल बरड़िया ने संचालन किया।

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