ajwain
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बेंगलूरु। अजवाइन की हरी पत्तियों को पालक और सरसों के साथ मिलाकर साग बनाया जाए, तो साग अत्यधिक स्वादिष्ट बनता है तथा बीज विभिन्न घरेलू उपयोगों जैसे परांठे, कढ़ी, आम के खट्टे तथा विभिन्न प्रकार के अचार तथा चटनियों में इस्तेमाल किए जाते हैं। अजवाइन का उपयोग मसालों के अलावा तेल व अर्क निकाल ने में भी होता है एवं आयुर्वेद में अजवाइन को एक गुणकारी औषधि कहा गया है। इसकी तासीर कटु एवं गर्म है। यह कफ, कृमि, वमन, मितली, खट्टी डकार, आफरा एवं अतिसार आदि को दूर करने में मदद करती है, आइए आप भी अजवाइन के गुणों को जानिए एवं लाभ प्राप्त कीजिए।

पेट का दर्द
नमक और अजवाइन गुनगुने पानी के साथ लेने से भी पेट दर्द में आराम मिलता है। पेट दर्द अधिक होने पर थोड़ा-सा भूनकर पीस लें। सेंधा नमक, हींग, अजवाइन और आंवला इनका चूर्ण बनाकर गर्म जल के साथ लें आराम मिलेगा।

दांत का दर्द
अजवाइन के बीजों को पीसकर इसे थोडी-सी रूई में रखकर दांत के दर्द में लगाएं। अजवाइन के काढ़े से कुल्ला करने पर भी दांत दर्द दूर होता है।

जोड़ों के दर्द में
अजवाइन की पुल्टिस बनाकर या अजवाइन के तेल की मालिश करने से जोड़ों के दर्द, जकड़ाहट आदि में लाभ होता है।

सूजन और दर्द में
एक चम्मच अजवाइन और लहसुन की चार-पांच कलियों को सरसों के तेल में भून लें। इस तेल को छानकर सूजन या दर्द वाले स्थान पर मलें, आराम मिलेगा।

खांसी में
अजवाइन को तवे पर भून कर पीस लें, इसमें पिसी हुई चीनी मिलाकर हवा रहित डिब्बे में रख लें जब भी खांसी हो, चुटकी भर मिश्रण चाट लें। खांसी यदि बलगम वाली हो, तो अजवाइन चबाएं आराम मिलेगा।

बदहजमी
अजवाइन चबाने के बाद पानी पीने से बदहजमी तथा पेट की गैस की शिकायत दूर होती है। अजीर्ण में अजवाइन का चूर्ण सेंधा नमक के साथ लें लाभ मिलेगा। अजवाइन का काढ़ा पीने से खट्टी डकार, वमन आदि में लाभ होता है। वायु गोला डठने पर अजवाइन एवं काला नमक पीसकर मट्ठे के साथ खाने से तुरंत राहत मिलती है।

सर्दी या सिर दर्द में
अधिक सर्दी या सिर दर्द होने पर अजवाइन को महीन पीसकर उसकी पोटली बनाकर गरम तवे पर रखकर सूंघने से लाभ होता है।

पाचन में
पूड़ी, कचौड़ी, पकौड़े एवं बाटी आदि में थोड़ी-सी अजवाइन डालने से इनका स्वाद बढ़ता है तथा यह शीघ्र पचाने में मदद करती है।

प्रसव के उपरांत
प्रसव के उपरान्त महिला को अजवाइन का हलवा शुद्ध देसी घी एवं गुड़ के साथ खिलाया जाता है, जिससे प्रसव के उपरान्त सभी जननांग पुनः अपने स्वरूप में आ जाते हैं।

अजवाइन चूर्ण
अजवाइन को साफ करें और उसमें इतना नीबू का रस डालें कि अजवाइन भीग जाए। अब इसमें स्वादानुसार काला नमक, सादा नमक एवं सेंधा नमक बराबर मात्रा में डालें एव अच्छी तरह हिलाकर लगभग दो घंटे तक छोड़ दें। जब अजवाइन नींबू के रस में अच्छी तरह भीग जाएं तब इसे अच्छी तरह सूखा लें। सूख जाने पर बोतल में भरकर रखें तथा भोजन करने के बाद खाएं।

इसे बनाने के लिए निम्न सामग्री की आवश्यकता होती है-अजवाइन 50 ग्राम, हींग (फूली हुई) थोड़ी-सी (अंदाज से), थोड़ी हरड़ 20 ग्राम, सेंधा नमक 5 से 10 ग्राम। इन सबको मिलाकर चूर्ण बनाकर बोतल में भरकर रख लें। यह पेट दर्द, आफरा, अपच आदि में लाभ पहुंचाता है।

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