दमदार माननीयों की भीड़

0
134

केंद्र सरकार ने सर्वोच्च न्यायालय में शपथ-पत्र प्रस्तुत कर बताया है कि देशभर में १७६५ सांसद और विधायकों के विरुद्ध ३०४५ आपराधिक मुकदमे लंबित हैं। यानी, कई माननीय ऐसे हैं, जिन पर एक से अधिक आपराधिक मुकदमे विचाराधीन हैं। उत्तर प्रदेश में ऐसे लोगों की संख्या सबसे अधिक है, जबकि तमिलनाडु दूसरे और बिहार तीसरे नबंर पर हैं। ये आंक़डे केंद्र सरकार ने शीर्ष न्यायालय के निर्देश पर जुटाए हैं्। कोर्ट में भाजपा नेता और वकील अश्वनी कुमार उपाध्याय द्वारा दायर एक जनहित याचिका पर ये आंक़डे एकत्रित करवाए गए हैं। इन आंक़डों के सामने आने से यह तो साफ हो गया है कि राजनीति में दागी नेताओं के प्रभुत्व पर कोई अंकुश नहीं लगा है। अभी तो बॉम्बे उच्च न्यायालय के आंक़डे नहीं आए हैं, यह आंक़डे सामने आने के बाद राजनीति में सक्रिय दागियों की संख्या में इजाफा होनेवाला है। दरअसल केंद्र सरकार ने आंक़डे एकत्र करने के लिए सभी राज्य सरकारों, केंद्र शासित प्रदेशों, राज्य विधानसभाओं, राज्यसभा एवं लोकसभा सचिवालयों के साथ ही उच्च न्यायालयों से दागी जन प्रतिनिधियों की सूचना मांगी थी। इनमें से २३ उच्च न्यायालयों, ७ विधानसभाओं और ग्यारह राज्य व केंद्र शासित प्रदेशों ने दागियों का ब्यौरा भेजा है। यानी राज्य सरकारें एवं विधानसभाएं सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों की अवहेलना करने से भी नहीं हिचकिचाती हैं। यह स्थिति तब है, जब सर्वोच्च न्यायलय १० जुलाई २०१३ को एक फैसले में जनप्रतिनिधित्व कानून की धारा ८ (४) को अंसवैधानिक करार दे चुकी है। इस आदेश के मुताबिक अदालत द्वारा दोषी ठहराते ही जनप्रतिनिधि की सदस्यता समाप्त हो जाएगी। अदालत ने यह भी साफ किया था कि संविधान के अनुच्छेद १७३ और ३२६ के अनुसार दोषी करार दिए लोगों के नाम मतदाता सूची में शामिल ही नहीं किए जा सकते हैं। इसके उलट जनप्रतिनिधित्व कानून की धारा ८ (४) के अनुसार सजायाफ्ता जनप्रतिनिधियों को निर्वाचन में भागीदारी के सभी अधिकार हासिल हैं। अदालत ने महज इसी धारा को विलोपित कर दिया था। इसी आधार पर लालू प्रसाद यादव जैसे प्रभावी नेता सजा मिलने के बाद चुनाव ल़डने से वंचित हैं। दरअसल सभी राजनीतिक दल चुनाव के पूर्व प्रत्याशियों को टिकट देने के लिए एक ही मानदंड पर ध्यान देते हैं कि उम्मीदवार हर हाल में जिताऊ हो। यह योग्यता रखने वाले दलबदलुओं को भी दूसरे दल आसानी से झेल लेते हैं। यही वजह रही कि दागियों की संख्या सदनों में ब़ढती जा रही है। एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म ने इन्हीं प्रतिनिधियों के शपथ पत्रों से पता लगाया था कि लोकतंत्र के पवित्र सदनों में ४८३५ सांसद व विधायकों में से १४४८ के खिलाफ आपराधिक मामले चल रहे हैं्। जाहिर है, ऐसा कानून फौरन वजूद में लाने की जरूरत है, जो राजनीतिक दागियों के आरोपित होने के साथ ही, उन्हें मिली विशेष कानूनी सुरक्षा से वंचित कर दे।

Facebook Comments

LEAVE A REPLY