नई दिल्ली। राज्यसभा उपसभापति के लिए गुरुवार को होने जा रहे चुनाव के कई मायने हैं। इससे न केवल राजग की ताकत का अहसास होगा, बल्कि विपक्ष की एकजुटता के दावों की असल तस्वीर भी दिखाई देगी। अब तक की रिपोर्ट बता रही है कि एनडीए की स्थिति बेहतर है। कांग्रेस एनडीए सरकार को घेरने के लिए पूरा जोर लगा रही है लेकिन बहुमत का आंकड़ा जुटाने में उसे खासी मशक्कत करनी पड़ रही है। कुल मिलाकर बात यह है कि कांग्रेस का खेल मोदी-शाह की जोड़ के सामने फेल होता नजर आ रहा है। क्योंकि:

1. अभी तक की तस्वीर के मुताबिक भाजपा के ये दोनों कद्दावर नेता राजग को अपने उम्मीदवार के पक्ष में मतदान करने के लिए एकजुट रख पाए हैं। नीतीश भी ​हरिवंश को जिताने के लिए पूरी मेहनत कर रहे हैं। इससे पार्टी और उसके घटक दलों सहित विपक्ष में भी यह संदेश गया है कि राजग एकजुट है। कभी-कभार जो विरोध के स्वर उठे, वे स्थायी नहीं हैं।

2. राजग उम्मीदवार के लिए बीजद का फैसला अत्यंत महत्वपूर्ण है। चुनाव नतीजे इस पर काफी हद तक निर्भर करेंगे। चुनाव में बीजद के 9 सांसद किसी का भी खेल बना और बिगाड़ने की भूमिका में हैं। मोदी के अलावा नीतीश भी बीजद प्रमुख नवीन पटनायक के संपर्क में थे और उन्होंने वक्त पर समर्थन भी दे दिया। कांग्रेस इन्हें अपने पाले में खींच ले जाने में कामयाब नहीं हुई।

3. संसद से बाहर कांग्रेस और विपक्ष जिस एकजुटता का दावा करते रहे हैं, वह यहां उतनी मजबूत दिखाई नहीं दे रही। खबर है कि आम आदमी पार्टी मतदान प्रक्रिया से दूर रहेगी। इसी तरह पीडीपी के बारे में भी कहा जा रहा है कि वह मतदान में भाग नहीं लेगी। कभी मुलायम सिंह के बेहद करीबी रहे अमर सिंह ने भी ऐलान कर दिया है कि वे एनडीए के पक्ष में ही मतदान करेंगे। इस तरह विपक्ष की एकजुटता शुरुआत में ही खतरे में पड़ती नजर आ रही है।

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