मैसूरु। अगर बालिकाओं को उचित शिक्षा दी जाए तो वह एक पूर्णत: शोषण मुक्त समाज का निर्माण कर सकती हैं। जिला प्रभारी मंत्री एचसी महादेवप्पा ने मंगलवार को अपना यह विश्वास व्यक्त किया। वह आज यहां महारानी कॉलेज ऑफ कॉमर्स एंड मैनेजमेंट में प़ढाई करनेवाली अनुसूचित जाति/जनजाति वर्ग की छात्राओं को सरकार की ओर से नि:शुल्क लैपटॉप बांटने के एक कार्यक्रम के उद्घाटन सत्र को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री सिद्दरामैया ने राज्य की अजा-जजा वर्गों की छात्राओं को लैपटॉप बांटने का सपना देखा था और आज उनका यह सपना पूरा हो गया है। राज्य के १ लाख ८० हजार विद्यार्थियों को शासन की ओर से नि:शुल्क लैपटॉप बांटे जा रहे हैं। इनमें शिक्षा से जु़डे विषयों की जानकारी मौजूद है।महादेवप्पा ने छात्राओं का हौसला ब़ढाते हुए कहा कि आज के विद्यार्थी बुद्धिमत्ता के पैमाने आईक्यू के मामले में पूर्व के विद्यार्थियों की अपेक्षा कहीं बेहतर हैं। आज शिक्षा का ढर्रा भी पहले से कहीं बदल चुका है। यह सब कुछ देश में तकनीकी विकास के कारण संभव हो सका है। राज्य सरकार ने महिलाओं की शिक्षा को महत्व देते हुए उन्हें तकनीक से जो़डने का प्रयास किया है। उन्होंने संविधान निर्माता डॉ. बीआर अंबेडकर का संदर्भ लेते हुए कहा कि भारतीय संविधान में महिला शिक्षा को प्राथमिकता देने की जरूरत रेखांकित की है। शिक्षा के जरिए ही समाज के हाशिए पर जीवन गुजारने वाले वर्गों का समुचित विकास हो सकता है। उन्हें समाज की मुख्यधारा में पर्याप्त स्थान दिए जाने की जरूरत है। अगर इन वर्गों की महिलाओं और युवतियों को उचित शिक्षा दी जाए तो वह सभी प्रकार के शोषण से मुक्त हो सकती हैं। महादेवप्पा ने कहा कि आज नेताजी सुभाषचंद्र बोस की जयंती भी है, जिन्होंने एक स्वतंत्र और विकसित भारत का सपना देखा था। उन्होंने नेताजी की तस्वीर पर श्रद्धा सुमन भी अर्पित किए।

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