इंसान ही नहीं, पौधे भी होते हैं बीमार, ऐसे करें देखभाल वरना उजड़ जाएगी बगिया

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बेंगलूरु। इंसानों की तरह फूल-पौधे भी तरह-तरह की बीमारियों का शिकार होते हैं। जिस परिश्रम और उत्साह से हम घर की बगिया में पौधे लगाते हैं, उसी लगन से पौधों को हानिकारक कीड़ों और बीमारियों से बचाना भी जरूरी है, तभी सही मायने में हम फूलों से लहलहाती बगिया का आनंद ले सकते हैं। कीड़ों और बीमारियों से अपनी बगिया को कैसे बचाएं-इसकी जानकारी बागवानी के शौकीन सभी लोगों को होना जरूरी है।

किस पौधे में कौन से कीड़े लगते हैं और उनका क्या इलाज है, यह जानना भी जरूरी है। समय समय पर तने और विशेषकर पत्तियों के निचले भाग को देखते रहें कि कहीं कोई कीड़ा तो नहीं लग गया है। एक बार कीड़ा लगने पर उन्हें नष्ट करना मुश्किल हो जाता है। अतः कोशिश यही होनी चाहिए कि पौधों में कीड़ा लगे ही नहीं। पौधों में कीड़े और बीमारियां ना हों, इसके लिए बहुत दवाइयां हैं, लेकिन ये आमतौर पर जहराली होती हैं, इसलिए इनके इस्तेमाल में अतिरिक्त सावधानी बरतें। पौधों में लगने वाले कीड़े और बीमारियां, फफूंदी पौधों की जड़ों को नुकसान पहुंचाती हैं, ध्यान रखें कि जड़ें गीली ना रहें।

1. फफूंदी नाशक दवाओं का प्रयोग करें। पौधे लगाने से पहले यह सुनिश्चित कर लें कि मिट्टी में दीमक तो नहीं है। दीमक लगने पर मिट्टी को खोद कर खुली हवा और तेज धूप में डाल दें। स्ट्राइक नाम की दवाई को पानी में घोल कर उसका उपयोग करें। जहां संभव हो, वहां मिट्टी में नीम की खली मिला दें।

2. मौसम बदलने पर पत्तियों की ऊपरी या निचली सतह पर छोटे-छोटे कीट चिपक जाते हैं। इस कीट को चेपा कहते हैं। यह पौधों का विकास रोक देते हैं, जिससे पत्तियों का आकार बिगड़ने लगता है। इसके लिए रोगर, मेलाथियोन या स्टाक नामक दवाइयों में से किसी एक का घोल बनाकर स्प्रे कर दें।

3. मिली बग पत्तियों व शाखाओं में से रस चूस कर उन्हें कमजोर करते हैं। इसी प्रकार श्रिप्स नाम का कीड़ा भी पत्तियों का रस चूस लेता है, जिससे वे सिकु़ड कर गिर जाती हैं। इस स्थिति में पैराथियान या रोगर का प्रयोग करें। कीटनाशक पदार्थों का प्रयोग प्रातःकाल या फिर शाम को ही करें। वर्षा की संभावना हो, तो कीटनाशक दवाओं का प्रयोग ना करें।

4. रसायनों को बच्चों, पालतू व अन्य जानवरों की पहुंच से दूर रखें। कीटनाशक रसयानों का छिड़काव करते समय मुंह और नाक को किसी कपड़े से ढक लें। इनका छिड़काव करते समय आसपास कोई अन्य व्यक्ति या बच्चा नहीं होना चाहिए।

5. छिड़काव करने वाली दवाओं का घोल हाथों से ना बनाएं, बल्कि इसके लिए किसी लकड़ी या छड़ी का प्रयोग करें। एक्सपायरी तिथि के निकलने से पहले ही रसायनों का प्रयोग करें। किसी भी दवाई या रसायन का प्रयोग करने से पहले डिब्बे या शीशी पर दिए गए निर्देशों को अच्छी तरह पढ़ लें। दवाइयां हमेशा कम मात्रा में ही लें। दवा छिड़कने के बाद अच्छी तरह हाथ धो लें।

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