rampal baba
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हिसार। वर्ष 2014 के सतलोक आश्रम कांड में गुरुवार को रामपाल पर अदालत का फैसला आ गया है। उसे हत्या के दो मामलों में दोषी ठहराया गया है। अतिरिक्त जिला और सत्र न्यायाधीश डीआर चालिया ने फैसला सुनाया। सजा का ऐलान 16 और 17 अक्टूबर को होगा। सुरक्षा के मद्देनजर हिसार सेंट्रल जेल को ही अदालत कक्ष में तब्दील किया गया। वीडियो कॉन्फ्रेसिंग के माध्यम से रामपाल की पेशी हुई और फैसला सुनाया गया। अदालत ने केस नं. 429 में रामपाल समेत 15 आरोपियों को दोषी करार दिया है। इस मामले में सजा का ऐलान 16 अक्टूबर को होगा।

इसके अलावा केस नं. 430 में रामपाल समेत 13 आरोपी दोषी करार दिए गए। इसमें सजा का ऐलान 17 अक्टूबर को होगा। केस 429 का संबंध चार महिलाओं और एक बच्ची की मौत से है। वहीं केस 430 एक महिला की मौत से जुड़ा  है।

बता दें कि रामपाल लगभग चार साल से जेल में बंद है। यह मामला नवंबर, 2014 का है, जब न्यायालय के आदेश के बाद भी रामपाल एक केस के सिलसिले में पेश नहीं हुआ था। इसके बाद पुलिस उसके बरवाला स्थित सतलोक आश्रम में घुसी और रामपाल को बाहर निकालने के लिए आॅपरेशन चलाया गया। उसी दौरान हिंसा भड़की जिसमें पांच महिलाओं और एक बच्चे समेत सात लोगों की मौत हो गई थी।

गुरुवार को अदालत का फैसला आने से पहले ही हिसार में सुरक्षा के पुख्ता प्रबंध किए गए थे। हिसार शहर की सीमाएं सील कर दी गईं। यहां धारा 144 लागू की गई थी। करीब 2,000 सुरक्षाबल मुस्तैदी से तैनात थे। रामपाल के समर्थकों को हिसार शहर में प्रवेश से रोकने के लिए कई जगह पुलिस नाके लगाए गए। अदालत के बाहर तीन किमी तक मजबूत घेरा बनाया गया ताकि रामपाल के समर्थक न्यायिक प्रक्रिया में बाधा न डाल सकें।

बता दें कि अगस्त 2017 में हिसार की अदालत ने रामपाल को दो मामलों में बरी कर दिया था। उस पर सरकारी काम में बाधा डालने और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने के मामले चल रहे थे। विभिन्न रिपोर्टों के अनुसार, उस वक्त तक रामपाल पर कुल छह मामले थे जिनमें से वह दो में बरी हो गया था। इसके अलावा उस पर हत्या, देशद्रोह, बंधक बनाने और अवैध तरीके से सामग्री इकट्ठी करने के मामले थे।

खुद को कहता है कबीर का अवतार
8 सितंबर, 1951 को हरियाणा के सोनीपत के धनाना गांव में जन्मा रामपाल सिंह जतिन खुद को संत कबीर का अवतार कहता है। यही नहीं, वह खुद को भगवान घोषित कर चुका है और उसके कई भक्त मानते हैं कि वह सच में ही भगवान है। वह इंजीनियरिंग में डिप्लोमा कर हरियाणा के सिंचाई विभाग में इंजीनियर के पद पर तैनात था, लेकिन 1996 में इस्तीफा देकर लोगों को उपदेश देने लगा।

इस दौरान उसके भक्तों की तादाद बढ़ती गई। कई संगठनों के साथ उसके विवाद भी बढ़ते गए। रामपाल स्वामी दयानंद सरस्वती सहित कई धर्मगुरुओं पर विवादित टिप्पणी कर चुका है। वर्ष 2006 में ऐसी ही एक टिप्पणी के बाद रामपाल समर्थकों और अन्य लोगों के बीच झड़प हो गई थी। उसमें एक महिला की मौत हो गई। उसके बाद रामपाल को 22 महीनों तक जेल में रहना पड़ा। अप्रेल 2008 में उसकी रिहाई हुई। यह भी आरोप लगा था कि जो लोग रामपाल की जय नहीं बोलते थे, उसके अनुयायी ऐसे लोगों के साथ मारपीट करते थे। हालांकि रामपाल के रसूख के कारण ऐसे मामले वहीं दबकर रह गए।

गिरफ्तारी के वक्त हंगामा
रामपाल को 2006 के उक्त हत्या मामले में 2008 में जमानत मिली। उसके बाद वह दोबारा अदालत में पेश नहीं हुआ था। जब अदालत ने उसे पेश होने का आदेश दिया तो उस पर कोई असर नहीं हुआ। आखिरकार पुलिस ने नवंबर 2014 में उसे गिरफ्तार किया और उसकी पेशी हुई। इन सबके बीच भारी विवाद हुआ और रामपाल के समर्थकों ने उत्पात मचाया। इसलिए अदालत के फैसले के मद्देनजर इस बार पुलिस और प्रशासन ने काफी तैयारी की थी।

कई ‘बाबा’ पहुंचे जेल
रामपाल का यह मामला भी जेल गए कुछ चर्चित बाबाओं की तरह खूब सुर्खियों में रहा है। हालांकि जेल भेजे गए ऐसे हर शख्स की कहानी कुछ अलग थी। अब तक आसाराम, गुरमीत राम रहीम, फलाहारी बाबा जैसे लोग जेल की हवा खा चुके हैं।

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