asia bibi pakistan
asia bibi pakistan

इस्लामाबाद। पाकिस्तान में सर्वोच्च अदालत के फैसले के बाद ईश निंदा के मामले में बरी की गईं आसिया बीबी पर खतरा मंडरा रहा है। आसिया के प​रिवार और वकील भी खौफ के साए में जी रहे हैं। कट्टरपंथी संगठनों ने धरना-प्रदर्शन तो खत्म कर दिया, लेकिन अब भी उनकी मांग है कि आसिया को फांसी पर लटकाया जाए। ए​क रिपोर्ट के अनुसार, लगातार कट्टरपंथियों की धमकियां मिलने के बाद आसिया के वकील ने मुल्क छोड़ने का फैसला किया है। उन्होंने कहा है कि वे जिंदा रहना चाहते हैं ताकि आसिया की लड़ाई जारी रख सकें।

आसिया बीबी (47) के वकील सैफ-उल-मलूक ने सरकार से अनुरोध किया है कि वह उनके परिवार की सुरक्षा करे। उन्होंने बताया कि आसिया को जेल से रिहा कर दिया गया है। वहीं पाकिस्तानी मीडिया में ऐसी रिपोर्टें प्रकाशित हुई हैं कि सुरक्षा के मद्देनजर उन्हें दूसरी जेल में भेजा गया है। आसिया बीबी के वकील ने कहा है कि वे नीदरलैंड गए हैं। उनके मुताबिक, आसिया को भी रिहा कर एक विमान में बैठाया गया है। उन्होंने कहा है कि विमान कहां जाएगा, इसकी उन्हें जानकारी नहीं है।

स्थानीय मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, आसिया बीबी को मुल्तान की एक जेल से रिहा कर दिया गया है। उन्हें रावलपिंडी स्थित नूर खान एयरबेस ले जाया गया। यहां से उन्हें नीदरलैंड भेजा जाएगा। हालांकि पंजाब प्रांत की सरकार ने इस पर टिप्पणी करने से इनकार किया।

गौरतलब है कि पाकिस्तान में पिछले दिनों उस वक्त विवाद भड़क उठा जब सर्वोच्च अदालत ने ईश निंदा के मामले में ईसाई महिला आसिया बीबी को रिहा करने का आदेश जारी किया था। इससे नाराज होकर कट्टरपंथी सड़कों पर उतर आए और जमकर तोड़फोड़ की। इसके बाद पाकिस्तान सहित दुनियाभर के मानवाधिकार कार्यकर्ताओं ने यह आशंका जताई कि अब इस मुल्क में आसिया का जिंदा रह पाना नामुमकिन है। उन्हें दूसरे देशों में शरण देने की बात की जाने लगी।

कट्टरपंथी पार्टी तहरीक-ए-लब्बैक (टीएलपी) के कार्यकर्ताओं ने जमकर हुड़दंग मचाया था। पाकिस्तान में यह पार्टी अब भी मांग कर रही है कि आसिया को अविलंब फांसी दे दी जाए। बता दें कि पंजाब के शेखपुरा जिले की निवासी आसिया बीबी जून 2009 में महिलाओं के साथ स्थानीय खेत में काम कर रही थी। उसने पानी पीने की कोशिश की तो विवाद हो गया। स्थानीय महिलाओं ने कहा कि उसने कुएं को अपवित्र कर दिया है। उन्होंने स्थानीय धर्मगुरुओं से शिकायत की और आसिया के खिलाफ ईशनिंदा का मामला दर्ज करवा दिया।

इसके बाद पाकिस्तान में भयंकर हिंसा भड़की और आसिया के परिवार को पीटा गया। 1980 के दशक में तानाशाह जनरल जिया उल हक पाकिस्तान में ईशनिंदा कानून लेकर आए थे। ऐसे कई मामले आ चुके हैं कि जब इस कानून की आड़ में ईसाइयों, हिंदुओं, अहमदियों और अन्य अल्पसंख्यकों को निशाना बनाया गया। वर्ष 2010 में आसिया बीबी को निचली अदालत ने फांसी की सजा सुना दी थी। जब मामला सर्वोच्च अदालत पहुंचा तो उन्हें निर्दोष करार दिया गया। आसिया के पांच बच्चे हैं। उनको भी कट्टरपंथियों से खतरा बताया जा रहा है।

ये भी पढ़िए:
– बांग्लादेश: 1971 के युद्ध में हिंदुओं की हत्या करने वाले दो कट्टरपंथियों को सजा-ए-मौत
– चीन से मदद मांगने इमरान पहुंचे बीजिंग, पाकिस्तानी चैनल ने लिखा भीख, खूब लगे ठहाके
– बिहार में छठव्रतियों को 6 हजार रु. मिलने की अफवाह, डाकघरों में उमड़ी भीड़ से कर्मचारी परेशान
– यूट्यूब पर धूम मचा रहा है आम्रपाली दुबे का यह वीडियो, छठ को है समर्पित

LEAVE A REPLY