rbi
rbi

नई दिल्ली/दक्षिण भारत। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) ने रेपो रेट में 0.25 प्रतिशत कटौती का फैसला किया है। इस फैसले से रेपो रेट 6.50 से घटकर 6.25 प्रतिशत हो गई है। रिवर्स रेपो रेट भी घटाकर 6 प्रतिशत कर दी गई है। बता दें कि एमपीसी के चार सदस्यों ने कटौती का समर्थन किया, वहीं दो सदस्य विरल आचार्य और चेतन घाटे कटौती के पक्ष में नहीं थे। रेपो रेट में परिवर्तन से आम आदमी की जेब पर असर होता है। रेपो रेट में कटौती के बाद होम लोन, पर्सनल लोन और वाहन लोन सहित छोटे उद्योगों के लिए कर्ज की दरें कम हो सकती हैं।

पिछले साल दिसंबर में मौद्रिक नीति समीक्षा में आरबीआई की ओर से ब्याज दरों में कोई परिवर्तन नहीं किया गया था। उस समय रेपो रेट में कटौती का संकेत दिया गया था। आरबीआई की ओर से कहा गया था कि मुद्रास्फीति का जोखिम न हुआ तो रेपो रेट में कटौती संभव है। इसके बाद लोग नए साल में कटौती की उम्मीद कर रहे थे। अब पूरे 25 बेसिस पॉइंट की कटौती के बाद आम आदमी को इसका फायदा मिलने की उम्मीद है। इससे बैंकों की ओर से सस्ते होम लोन का ऐलान हो सकता है। वहीं ब्याज दरों में कटौती से ईएमआई कम हो सकती है, लोन रीपेमेंट पीरियड में कटौती का फायदा मिलेगा। लोगों को महंगाई में कुछ राहत मिलेगी।

आरबीआई की ओर से पिछली तीन मौद्रिक समिति बैठकों में पॉलिसी दरें अपरिवर्तित रहीं। उससे पहले दो बार 0.25 प्रतिशत की बढ़ोतरी की गई थी। आरबीआई ने 2019-20 के लिए जीडीपी वृद्धि दर का अनुमान 7.4 प्रतिशत रखा है। खुदरा महंगाई दर के लिए जनवरी-मार्च में 2.4 प्रतिशत और अप्रेल-सितंबर में 3.2 से 3.4 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया गया है। हालांकि साल की तीसरी तिमाही के लिए यह अनुमान 3.9 प्रतिशत रखा गया है। गवर्नर शक्तिकांत दास ने महंगाई दर 4 प्रतिशत लक्ष्य या इससे कम रहने की उम्मीद जताई है। महंगाई दर में कमी से आरबीआई रेपो रेट में कटौती कर पाया है। आरबीआई ने किसानों के लिए जमानत मुक्त कृषि ऋण की सीमा 1 लाख रुपए से बढ़ाकर 1.60 लाख रुपए कर दी है। आरबीआई गवर्नर शक्तिकांत दास की अध्यक्षता में यह पहली मौद्रिक नीति समीक्षा है।

LEAVE A REPLY