बेंगलूरु/दक्षिण भारतगांधीनगर में साध्वीश्री कंचनप्रभाजी के सान्निध्य में तेरापंथ महिला मंडल के तत्वावधान में आयंबिल हुए। आयंबिल वह तप है जिसके द्वारा कई नई शक्तियों को उद्धाटित किया जा सकता है। महिला मंडल हर चातुर्मास में आयंबिल करके और करवा के आनन्दानुभूति महसूस करती है। साध्वीजी ने कहा कि आयंबिल निर्जरा के बारह भेदों में एकभेद है, जिसमेंे अनोदरी तप समाविष्ट किया जाता है। आयंबिल स्वाद विजय की बहुत ब़डी साधना है, क्योंकि उसे बिना नमक मात्र एक अन्न की बनी चीजें ही खाई जा सकती है। साध्वीश्री मंजुरेखाजी ने कहा, आयंबिल तप आत्म विजय का एक बहुत ब़डा सोपान है, इससे विचार परिष्कृत होते हैं, भव अनासक्ति के भाव जागृत होते हैं और परिपक्व जीवन शैली बनती है। जिससे जिन्दगी की हर प्रतिकूलता को इन्सान आराम से मुक्त होकर जीने की कोशिश करता है। महिला मंडल की मंत्री श्रीमती सीमा श्रीमाल ने अपने विचार रखे। पूर्वाध्यक्ष श्रीमती कांता लो़ढा, सरस्वती बाफना, चंद्राबाई चोप़डा, सुनीता बाई आदि अनेक महिलाएं आयंबिल में शामिल हुईं।

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