aadhaar card
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नई दिल्ली। उच्चतम न्यायालय ने बुधवार को आधार कार्ड पर अहम फैसला सुनाया है। फैसला पढ़ते हुए जस्टिस सीकरी ने कहा कि आधार एकदम सुरक्षित है। आधार पर हमला संविधान के खिलाफ है। इसने समाज के वंचित तबकों को सशक्त किया है और उन्हें एक पहचान दी है। उन्होंने कहा कि आधार से गरीबों को ताकत मिली है और इसका डुप्लीकेट बनाना मुमकिन नहीं।

उच्च्तम न्यायालय ने आधार एक्ट की धारा 57 को रद्द किया है। अब प्राइवेट कंपनियां आधार की मांग नहीं कर सकतीं। वहीं जस्टिस सीकरी ने डेटा सुरक्षा के लिए कहा है कि केंद्र जल्द मजबूत कानून लेकर आए। न्यायालय ने कहा कि सरकार यह सुनिश्चित करे कि अवैध प्रवासियों को आधार कार्ड न मिले। इसके अलावा बैंक अकाउंट और मोबाइल सिम के लिए भी आधार जरूरी नहीं।

न्यायालय ने कहा है कि आधार कार्ड बनाने के लिए जो डेटा लिया जा रहा है वह काफी कम है। वहीं कार्ड से जो लाभ मिलता है वो काफी ज्यादा है। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि 6 से 14 साल के बच्चों का स्कूल में दाखिला कराते समय आधार कार्ड जरूरी नहीं है। सीबीएसई, नीट और यूजीसी की परीक्षाओं के लिए आधार जरूरी नहीं होगा। हालांकि आयकर दाखिल करने और PAN के लिए आधार जरूरी बताया है। इसके अलावा सरकार की लाभकारी योजनाओं और सब्सिडी का फायदा लेने के लिए आधार कार्ड जरूरी होगा। बता दें कि आधार कार्ड का यह मुद्दा बेहद चर्चा में रहा है क्योंकि इसका संबंध देश के आम नागरिकों से है। आधार कार्ड मामले में उच्चतम न्यायालय सुनवाई पूरी कर चुका था। उसने 10 मई को अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था।

आधार कार्ड को लेकर यह विवाद रहा है कि इससे लोगों की निजता का उल्लंघन होता है। वहीं यूआईडीएआई इससे इनकार करता है। अब आधार पर उच्च्तम न्यायालय के फैसले ने पूरी तस्वीर स्पष्ट कर दी है। उल्लेखनीय है कि आधार का इस्तेमाल सरकारी और निजी क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर होता है। विशेष रूप से सरकारी योजनाओं का लाभ लेने के लिए हर जगह आधार कार्ड का उपयोग बढ़ता जा रहा है। कई सामाजिक संगठनों ने आधार की अनिवार्यता का विरोध किया था। उनका कहना है कि इससे व्यक्ति की निजता का उल्लंघन हो सकता है।

आज बैंक में खाता खुलवाने से लेकर मोबाइल की सिम लेने तक में आधार कार्ड की उपस्थिति बढ़ गई है। इससे कार्यों में तेजी आई है। पहले जहां लंबी कागजी कार्यवाही और दफ्तरों के चक्कर लगाने पड़ते थे, आधार कार्ड से वह प्रक्रिया बहुत आसान हो गई। इसके पक्ष में यह तर्क दिया जाता है कि इससे करचोरी और दूसरे गैर-कानूनी कार्यों का पता लगाया जा सकता है। इससे पहले उच्चतम न्यायालय कह चुका है कि जब तक आधार मामले पर उसका फैसला नहीं आ जाता, सरकार इसे अनिवार्य न करे। इस तरह उच्चतम न्यायालय ने आधार की वैधता को बरकरार रखा है।

प्रमोशन में आरक्षण पर फैसला
उच्चतम न्यायालय ने सरकारी नौकरी में प्रमोशन में आरक्षण पर भी फैसला सुनाया। न्यायालय ने कहा है कि प्रमोशन में आरक्षण देना जरूरी नहीं है। जस्टिस नरीमन ने कहा कि नागराज मामले में उच्चतम न्यायालय का फैसला सही था, लिहाजा इस पर दोबारा विचार करने की जरूरत नहीं है। कानून के जानकारों के मुताबिक, उच्चतम न्यायालय का यह फैसला सीधे तौर पर प्रमोशन में आरक्षण के खिलाफ नहीं है। उसने यह मामला राज्यों पर छोड़ा है।

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