आत्मा के समीप पहुंचने का पर्व है पर्युषण पर्व

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बेंगलूरु/दक्षिण भारत। यहां गोड़वाड़ भवन में श्री वर्धमान स्थानकवासी जैन श्रावक संघ चिकपेट शाखा के तत्वावधान में आध्यात्मिक चातुर्मास 2018 के तहत अहिंसा समवशरण के प्रांगण से गुरुवार को उपाध्यायश्री रवींद्रमुनिजी ने पर्युषण पर्व के शुभारंभ अवसर पर कहा कि देश और दुनिया में साधु हो या श्रावक-श्राविकाएं या अन्य सभी विविध आराधना में अनेक धर्म अनुष्ठान के लिए तत्पर हो जाते हैं। यह पर्व हमारा आध्यात्मिक आंतरिक पर्व है।

उन्होंने कहा, अंतर की चेतना का पर्व है जो कि हमें सुंदर प्रेरणा प्रदान करता है। पर्युषण का शाब्दिक अर्थ समझाते हुए मुनिश्री ने कहा कि इसके माध्यम से हम आत्मा के समीप पहुंच सकते हैं। पर्युषण पर्व में शास्त्रीय या संतों की प्रेरणा का कोई विशेष विधान नहीं है। अनेक प्रकार के विवेक लोग पर्युषण पर्व के दौरान स्वतः ही रखते हैं। यह पर्व बाहर की चकाचौंध और ऐश्वर्य का पर्व नहीं बल्कि आत्मिक पर्व है।

उन्होंने बहिरात्मा एवं अंतरात्मा की विस्तार से व्याख्या करते हुए कहा कि अंतर्मुखी होने के लिए ज्ञान, ध्यान, तप, त्याग और पुरुषार्थ जरूरी है। संसार की आकर्षक गतिविधियों के बावजूद यह पर्व हमें पुरुषार्थ करने की प्रेरणा देते हैं और अंतर्मुखी बनाने की ओर अग्रसर करते हैं। उन्होंने बहिर्मुखी से अंतर्मुखी बनने की सीख दी।

रवीन्द्रमुनि जी ने कहा कि वे आध्यात्मिक प्रयास के तहत भारत आकर यहां के धर्म तीर्थ स्थलों में आते हैं ध्यान मेडिटेशन की ओर अग्रसर होते हुए तथा अंतर्मुखी हो कर परम आनंद की अनुभूति करते हैं। उन्होंने जड़ को आत्मा व चेतन को शरीर के पुद्गल पदार्थ बताते हुए विस्तार से इसका उल्लेख भी किया।

उन्होंने कहा कि सबको जीवन में मूढ़ दशा को त्याग कर आत्म दशा को प्राप्त करना चाहिए्। इस अवसर पर सर्व धर्म दिवाकर सलाहकार श्री रमणीक मुनि जी ने अंतकृत के अर्थ, रहस्य, आस्था, विश्वास पर प्रकाश डालते हुए कहा कि अंतर्दशा सूत्र के गहरे अर्थ को समझना जरूरी है। उन्होंने कहा कि जिन्होंने जिंदगी के अंत समय यानी अंतिम सांसों के समय केवल ज्ञान को प्राप्त किया उसे अंतकृत कहा गया है।

इस सूत्र से संबंधित ऐतिहासिक कथा प्रसंग का विस्तार पूर्वक उल्लेख भी मुनिश्री ने किया तथा तृतीय वर्ग के प्रथम वर्ग का उपसहार वर्णन विस्तार से किया। इससे पूर्व रचितमुनि जी ने स्तवन प्रस्तुत किया। धर्म सभा का संचालन गौतमचंद धारीवाल ने किया। उन्होंने बताया कि गुरुवार को जाप के लाभार्थी पारसमल श्रवण कुमार कटारिया परिवार का रवीन्द्रमुनिजी ने जैन दुप्पटा ओढ़ाकर सम्मान किया।

श्री पारसमुनि जी ने मांगलिक प्रदान की। चिकपेट शाखा के इन्द्रचंद बिलवाि़डया ने बताया कि इस अवसर पर नासिक, पुणे, दिल्ली, चिकबल्लापुर सहित शहर के विभिन्न उपनगरों से बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने प्रवचन श्रवण का लाभ लिया। सभी का आभार चिकपेट शाखा के संरक्षक विजयराज लुणिया ने जताया।

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