बेंगलरु/दक्षिण भारत शहर के विजयनगर के जैन श्वेताम्बर तेरापंथी सभा के तत्वावधान में रविवार को विजयनगर स्थित राजयोग अपार्टमेन्ट में मुनिश्री रणजीतकुमारजी व चैतन्यमुनिजी के सान्निध्य में आचार्यश्री महाश्रमणजी का दीक्षा दिवस युवा दिवस के रुप में मनाया गया। मंगलाचरण से कार्यक्रम की शुरुआत हुई। विजयनगर सभा के अध्यक्ष धनराज टांटिया ने सभी का स्वागत किया तथा गुरुदेव के प्रति श्रद्धाभाव समर्पित किए। मुनिश्री रणजीतकुमारजी ने कहा कि गुरुदेव तीर्थंकर के प्रतिनिधि हैं। उनका जीवन स्वयं हमारे लिए प्रेरणा है। उन्होंने प्रति एक सांस को सार्थक करते हुए ऐसा जीवन जीया है जो सम्पूर्ण मानव जाति के लिए कल्याणकारी है। इस मौके पर मुख्य अतिथि के रुप में उपस्थित दक्षिण भारत राष्ट्रमत के समूह सम्पादक श्रीकांत पाराशर ने गुरुदेव के जीवन पर प्रकाश डालते हुए कहा कि वे मर्यादित, अनुशासित, निष्ठावान संत हैं। उनका जीवन महान जीवन का प्रतीक है। महान जीवन का अर्थ होता है, किसी प्रयोजन के साथ स्वयं को एकाकार कर लेना। एक ऐसा जीवन जो आपके जीवन से भी ब़डा हो, जिसके लिए आप सब कुछ न्योछावर करने को उद्दत हों। आचार्यश्री महाश्रमणजी का जीवन प्रेरणादायी है क्योंकि वे साधारण संन्यासी नहीं हैं। उनके विचारों में नवीनता है, क्रियेटिविटि है, आकर्षण है और सबसे ब़डी बात, व्यावहारिकता है। यही कारण है कि युवा पी़ढी उनकी ओर खिंची चली आती है।श्री पाराशर ने कहा, गुरु का सान्निध्य मिलने वाला है। उनके व्यक्तित्व और कृतित्व से दक्षिण की धरा भी गौरवन्वित होने वाली है। चेन्नई, बेंगलूरु और हैदराबाद के चातुर्मासों की घोषणा हो चुकी है। गुरु का सान्निध्य व्यक्ति के पूरे व्यक्तित्व को रुपांतरित करने की क्षमता रखता है। आचार्यश्री के पधारने की आहट मात्र से दक्षिण में एक नई उर्जा का संचार होता दिखाई दिया। तैयारियां चल रही हैं। बेसब्री से उनके सान्निध्य का इंतजार हो सकता है।इस अवसर पर विजयनगर महिला मंडल की मंत्री महिमा पटावरी, राजराजेश्वरीनगर सभा ट्रस्ट के अध्यक्ष कमल दुग्ग़ड, महिला मंडल की अध्यक्ष कंचनदेवी छाजे़ड, यशवंतपुर तेरापंथ सभा के उपाध्यक्ष मदनलाल बरि़डया, संतोष मुणोत, कन्या मंडल की सैफाली पितलिया, अभाममं की पूर्व महामंत्री वीणा बैद आदि ने गुरुदेव के ४५वें दीक्षा दिवस पर अपने विचार व्यक्त किए। । कार्यक्रम का संचालन तेरापंथ सभा विजयनगर के मंत्री राजेश चावत ने किया।

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