Illegal Rohingyas in India
Illegal Rohingyas in India

दिल्ली/भाषा। पूर्वोत्तर के छात्रों के एक प्रभावशाली संगठन ने केंद्र से पूरे क्षेत्र में राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (एनआरसी) लागू करने की मांग ताकि वहां रह रहे अवैध प्रवासियों का पता लगा कर उन्हें निर्वासित किया जाए। दि नॉर्थ ईस्ट स्टूडेंट्स आॅर्गनाइजेशन (एनईएसओ) ने यह भी दावा किया कि चीन अरुणाचल प्रदेश के उन निवासियों को अब भी नत्थी वीजा जारी कर रहा है जो वहां की यात्रा करना चाहते थे।

संगठन ने केंद्र से यह मुद्दा चीनी अधिकारियों के साथ उठाने का आग्रह किया। एनईएसओ के अध्यक्ष सैमुअल बी जिरवा ने यहां संवाददाता सम्मेलन में कहा, बांग्लादेश से अवैध प्रवासियों की घुसपैठ लगातार जारी है। हम मांग करते हैं कि असम की तरह पूरे पूर्वोत्तर क्षेत्र एनआरसी लागू किया जाना चाहिए।

इन दिनों पूरे देश में एनआरसी, बांग्लादेशी और रोहिंग्या जैसे शब्द खासे चर्चा में हैं। असम में एनआरसी ड्राफ्ट के बाद भारत के कई इलाकों से मांग उठी है कि अवैध ढंग से रह रहे घुसपैठियों को चिह्नत कर उन्हें बाहर निकाला जाए, क्योंकि ये देश की एकता, अखंडता, सुरक्षा और संसाधनों के लिए गंभीर खतरा हैं।

पिछले दिनों सरकार ने सात रोहिंग्याओं को वापस म्यांमार भेजा था। केंद्र सरकार इनके खिलाफ सख्त रुख दिखा चुकी है। वहीं कुछ राजनेता और सामाजिक कार्यकर्ता एनआरसी की प्रक्रिया का खुलकर विरोध कर चुके हैं। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इसका खासा विरोध किया था।

इसके अलावा प्रशांत भूषण रोहिंग्या घुसपैठियों के अधिकारों की मांग के लिए उच्चतम न्यायालय चले गए थे। हालांकि न्यायालय ने उनकी याचिका खारिज की और कहा कि हमें अपनी जिम्मेदारी न समझाएं। मुख्यत: बांग्लादेश और म्यांमार से आए इन घुसपैठियों का स्थानीय लोगों से कई बार टकराव हो चुका है। इनके गैर-कानूनी गतिविधियों में लिप्त होने की खबरें भी आती रही हैं।

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