बेंगलूरु/दक्षिण भारतमानवाधिकारों के क्षेत्र में काम करने वाले संगठन एम्नेस्टी इंडिया के यहां स्थित दफ्तरों में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के अधिकारियों की छापेमारी कार्रवाई का मुद्दा तूल पक़डने लगा है। संगठन ने शुक्रवार को इस कार्रवाई की तीखी निंदा की है। इसने दावा किया है कि एम्नेस्टी इंटरनेशनल के खिलाफ ईडी ने विदेशी दान नियमन कानून (एफसीआरए) के तहत छापेमारी की है। यह कार्रवाई इस तथ्य के बावजूद की गई कि संगठन का ढांचा पूरी तरह से भारतीय नियम-कानूनों के अनुरूप है। इस आधार पर एम्नेस्टी इंडिया ने कार्रवाई पर आपत्ति जताते हुए आज कई ट्वीट किए्। इनमें कहा गया है, ’’…यह कार्रवाई केंद्र सरकार के इस रुख की गवाही देती है कि अगर कोई भी व्यक्ति या संगठन सरकार के खिलाफ आवाज उठाए या उससे सवाल पूछे तो उन्हें कुचल दिया जाए।’’ इसके साथ ही संगठन ने दावा किया कि मौजूदा भारत सरकार देश की सिविल सोसाइटी में अपने प्रति डर की भावना पैदा करना चाहती है। गौरतलब है कि ईडी के अधिकारियों ने दो स्थानों पर स्थित एम्नेस्टी इंडिया के दफ्तरों पर छापेमारी की थी। यह संगठन पूरे देश में मानवाधिकार हनन के मामलों को उठाकर संबंधित राज्यों और केंद्र की सरकारों से तीखे सवाल पूछता है। इसके खिलाफ वर्ष २०१० में तत्कालीन गृह मंत्रालय ने एफसीआरए कानून के उल्लंघन का आरोप लगाते हुए एक गैर-सरकारी संगठन (एनजीओ) के तौर पर इसका पंजीयन रद्द कर दिया था। गुरुवार की छापेमारी उसी मामले की छानबीन के लिए की गई। एम्नेस्टी इंडिया ने आज इसकी जानकारी देते हुए अपने सिलसिलेवार ट्वीट्स में बताया कि छापेमारी के दौरान पांच से अधिक ईडी अधिकारियों ने संगठन के कर्मचारियों को दफ्तर में ही एक तरह से कैद कर लिया। उनके लैपटॉप बंद करवा दिए गए और उन्हें अपने मित्रों, जानकारों या परिवार के सदस्यों से मोबाइल फोन पर बातचीत करने की अनुमति तक नहीं दी गई। छापेमारी टीम के अधिकारियों ने हर कर्मचारी के डेस्क की जांच की। यह कार्रवाई १० घंटे तक चली और मध्य रात में इसका अंत हुआ। ट्वीट्स में दावा किया गया है कि एम्नेस्टी इंडिया के हर कर्मचारी ने अधिकारियों के साथ पूर्ण सहयोग किया। ंश्चठ्ठर्‍ द्मष्ठ डझ्उ ्य·र्ैंद्भय् ृझ्द्मय् झ्ूय्दूसरी ओर, ईडी ने आज जारी एक बयान में कहा, ’’एम्नेस्टी इंटरनेशनल इंडिया फाउंडेशन ट्रस्ट (एआइआईएफटी) को पूर्ववर्ती सरकार के गृह मंत्रालय ने एफसीआरए के तहत अनुमति या पंजीयन देने से इन्कार कर दिया था। इस पर संगठन ने एफसीआरए कानून से बचने के लिए एम्नेस्टी इंटरनेशनल इंडिया प्रा.लि. (एआईआईपीएल) नाम की एक वाणिज्यिक कंपनी बना ली।’’ ईडी के मुताबिक, एआईआईपीएल ने अब तक वाणिज्यिक रास्ते से ३६ करो़ड रुपए का विदेशी चंदा प्राप्त किया है। इस राशि में से १० करो़ड रुपए कंपनी को बतौर दीर्घावधि ऋण मिले। ईडी के मुताबिक, ’’यह राशि तत्काल फिक्स्ड डिपोजिट (सावधि जमा) में तब्दील कर दी गई। वहीं, इंडियन्स फॉर एम्नेस्टी इंटरनेशनल ट्रस्ट (आईएआईटी) नाम का एक और संगठन बनाकर उसे १० करो़ड रुपए की एफडी के खिलाफ १४.२५ करो़ड रुपए की रकम दिलवा दी गई। यह ट्रस्ट द्वारा विदेशी प्रत्यक्ष निवेश (एफडीआई) प्राप्त करने के समान ही था।’’ ईडी ने अपने बयान में कहा, ’’शेष २६ करो़ड रुपए सलाह सेवाओं के नाम पर एआईआईपीएल के दो अन्य बैंक खातों में जमा करवा दिए गए। इस तरह से एआईआईपीएल को विदेश से जो भुगतान मिला, वह एफडीआई के दिशा-निर्देशों का स्पष्ट उल्लंघन है।’’ ईडी के मुताबिक, इन्हीं कदमों की जांच और आगे की खोजबीन के लिए एम्नेस्टी इंडिया के दफ्तरों में गुरुवार को छापेमारी की गई। इस मामले की आगे की जांच भी जारी है।उल्लेखनीय है कि इससे पूर्व ईडी ने पर्यावरण के क्षेत्र में बेहद सक्रिय रहनेवाले एनजीओ ग्रीनपीस और इससे जु़डे संगठनों के बेंगलूरु स्थित दफ्तरों पर छापेमारी करने के बाद इनके एक दर्जन से अधिक बैंक खातों को सील कर दिया था। ग्रीनपीस के खिलाफ भी एफडीआई के नियम-कानूनों का उल्लंघन करने का आरोप लगाते हुए एफसीआरए कानून के तहत कार्रवाई की गई थी।

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