muni shri ji pravachan
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बेंगलूरु/दक्षिण भारत। वर्द्धमान स्थानकवासी जैन श्रावक संघ चिकपेट शाखा के तत्वावधान में यहां गोड़वाड़ भवन में उपाध्यायश्री रवींद्रमुनिजी ने गुरुवार को मंगलाचरण से धर्मसभा की शुरुआत की। इस अवसर पर सलाहकार श्री रमणीकमुनिजी ने ‘ज़िंदगी की असली चुनौतियां क्या हैं?’ विषयक प्रवचन शृंखला के दूसरे दिन अपने दैनिक प्रवचन में कहा कि धर्म साधना करते करते इतने वर्षों के बाद भी व्यक्ति उस योग्यता को प्राप्त नहीं कर पाया है, जिस आधार पर व्यक्ति की आध्यात्मिकता चिह्नित होती है।

उन्होंने कहा कि खुद को खुद से ही देखने पर खुद का ज्ञान होगा। जो भी धर्म की आराधना, स्वाध्याय, सामायिक आदि धर्म के निमित्त कुछ भी किया जाता है उसका लक्ष्य, उद्देश्य निश्चित कर लेना चाहिए्। दुनिया की चीजें पाने के लिए धर्म करने से संसार से मुक्ति नहीं मिलेगी, संसार से मुक्ति तो अपने आप को जानने, अपने आत्म स्वरूप को जानने से होगी। इसके बिना सिद्ध के स्वरूप को नहीं पाया जा सकता।

उन्होंने कहा कि दुनिया के किसी पदार्थ या वस्तु में सुख नहीं है। मन दुखी है तो व्यक्ति सुख के कितने भी साधन हों उन का उपयोग नहीं कर सकता है। श्रावकों की भूमिका माता-पिता के समान बताते हुए रमणीकमुनिजी ने कहा कि बड़ा बनाने वाला बड़ा होता है, छोटा समझने वाला बड़ा नहीं होता।

devotees to listen pravachan
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उन्होंने कहा, संतों द्वारा श्रावकों को माता-पिता व श्रावकों द्वारा गुरु को गुरुदेव मानना यह दोनों ओर से विनयशीलता- उदारता है, इसी को जिनशासन में गरिमामयी बताया गया है। उन्होंने कहा, आपका प्रेम जितना गहरा होगा उतनी ही समीपता परमात्मा व दूसरे व्यक्ति की आत्मा के प्रति होगी। इसे जानना ही सम्यकज्ञान होता है। किसी के दर्द को देखना समझना सम्यकदर्शन कहलाता है।

उन्होंने कहा, भगवान महावीर ने केवल ज्ञान को प्राप्त किया, मोह को जो नष्ट किया उसके पीछे एक ही दृष्टि व सम्यकदर्शन है कि बुरे को भूलना सीखना होगा। सामायिक का मतलब वर्तमान में रहना भी है। उन्होंने कहा कि वर्तमान में जीने वाला ही सम्यकदर्शनी है। जो भूत में अटक गया तथा भविष्य में भटक गया वह वर्तमान में साधना नहीं कर सकता है।

श्री ऋषिमुनिजी ने गीतिका सुनाई। धर्मसभा में उपप्रवर्तक श्रीपारसमुनिजी ने मांगलिक प्रदान की । चिकपेट शाखा के महामंत्री गौतमचंद धारीवाल ने संचालन किया। धारीवाल ने बताया कि गुरुवार को चौमुखी जाप के लाभार्थी ताराचंद सज्जनबाई भिलवाड़िया का रवींद्रमुनिजी ने जैन दुपट्टा ओढ़ाकर सम्मान किया। उन्होंने बताया कि धर्म सभा में आध्यात्मिक चातुर्मास के मुख्य संयोजक रणजीतमल क़ानूंगा, महावीर मूथा, जैन कॉन्फ्रेंस महिला शाखा की प्रदेशाध्यक्षा श्रीमती संतोष बोहरा सहित उपनगरीय संघों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे।

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