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बेंगलूरु/दक्षिण भारत। विधानसभा में विपक्ष के नेता और प्रदेश भाजपा अध्यक्ष बीएस येड्डीयुरप्पा ने शनिवार को यहां दावा किया कि मुख्यमंत्री एचडी कुमारस्वामी अपनी सरकार की विफलताओंं को ढकने के लिए विपक्षी पार्टी भाजपा के खिलाफ बेबुनियाद आरोप लगा रहे हैं। कुमारस्वामी का यह आरोप पूरी तरह निराधार है कि भाजपा ने कांग्रेस और जनता दल (एस) की गठबंधन सरकार को अस्थिर करने के लिए ‘ऑपरेशन कमल’ छेड़ रखा है। इसके साथ ही उन्होंने कुमारस्वामी द्वारा आम जनता से भाजपा के खिलाफ बगावत करने के आरोप की तीखी निंदा की।

उन्होंने कहा, जब रोम जल रहा था, उस समय नीरो चैन की बांसुरी बजा रहा था। जिस समय मुख्यमंत्री द्वारा घोषित कृषक ऋण माफी योजना पूरी तरह से नाकाम साबित हो चुकी है, उस समय वह इससे लोगों का ध्यान हटाने के लिए विपक्ष के खिलाफ आरोपबाजी कर रहे हैं। जिस समय राज्य के किसान आत्महत्या करने को मजबूर हैं, उस समय मुख्यमंत्री पूरे राज्य में मंदिरों के दौरे में व्यस्त हैं। वह लोगों की नजरों से अपनी विफलताएं छिपाने के लिए विपक्ष पर हमलावर रुख अपना रहे हैं। जब भी भाजपा और मैं राज्य को सुशासन देने में उनकी (कुमारस्वामी की) विफलता की बात करते हैं और किसानों की समस्याओं का समाधान करने में नाकाम रहने की बात कहते हैं, तभी वह विपक्ष पर राज्य सरकार को अस्थिर करने के प्रयास का आरोप लगाने लगते हैं।

येड्डीयुरप्पा ने दावा किया कि इन दिनों कर्नाटक के किसान बेहद बुरे दौर से गुजर रहे हैं और आम जनता भी इस सरकार से परेशान है। उन्होंने मंड्या जिले के एक किसान नंदीश और उसके परिवार के तीन अन्य लोगों द्वारा कर्ज के बढ़ते बोझ के कारण आत्महत्या किए जाने का जिक्र किया। येड्डीयुरप्पा ने दावा किया कि इस प्रकार की घटनाओं के बाद स्वाभाविक रूप से प्रदेश के किसान यह पूछेंगे कि मुख्यमंत्री की घोषणा के बावजूद बैंकों ने उनके कर्ज माफ क्यों नहीं किए?

येड्डीयुरप्पा ने कहा, नंदीश की आत्महत्या ने भाजपा के इस दावे को सच साबित कर दिया है कि कुमारस्वामी की अगुवाई वाली गठबंधन सरकार न सिर्फ जनकल्याण के वादे निभाने में असफल हो चुकी है, बल्कि इस सरकार दारा घोषित किसान ऋण माफी योजना भी किसानों के साथ एक प्रकार का छलावा थी।

येड्डीयुरप्पा ने कहा कि यही बात उन्होंने विधानसभा के पटल पर बजट सत्र के दौरान भी कही थी। अब यह साबित हो चुका है कि इस सरकार की किसान ऋण माफी योजना पूरी तरह से नाकाम हो चुकी है। अगर ऐसा नहीं होता तो कर्नाटक के इतने सारे किसानों को आत्महत्या करने की जरूरत ही क्यों पड़ती?

येड्डीयुरप्पा ने आरोप लगाया कि जबसे राज्य की सत्ता में इस गठबंधन सरकार का आना हुआ है, तबसे अब तक 50 से अधिक किसानों ने आत्महत्या कर ली है। उन्होंने इस ओर ध्यान दिलाते हुए कुमारस्वामी का आह्वान किया कि वह भाजपा के खिलाफ निचले स्तर की राजनीति करना बंद करें और राज्य की आम जनता की समस्याओं का समाधान करने पर अपना ध्यान केंद्रित करें। उन्हें खास तौर से उन समस्याओं पर गौर करना चाहिए, जिनका किसानों को हर रोज सामना करना पड़ रहा है। राज्य के 18 जिलों के किसान सूखे के हालात से दो-चार हो रहे हैं और उन्हें खरीफ की फसलों का भारी नुकसान उठाना पड़ा है। अब उनके पास रबी की फसलों की खेती के लिए पूंजी उपलब्ध नहीं है।

येड्डीयुरप्पा ने इसके साथ ही जोड़ा, हमारे लिए राज्य सरकार का सत्ता में बने रहना अधिक महत्वपूर्ण नहीं है, बल्कि आवश्यकता इस बात की है कि यह सरकार किसानों और आम जनता की समस्याओं के प्रति पूरी संवेदनशीलता जताए। अपनी राजनीतिक दांवबाजियों को कुछ देर के लिए विराम दें और आम जनता व किसानों की समस्याओं का समाधान करने पर पूरी ऊर्जा लगाएं।

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