चेन्नई। शनिवार को राज्य भर में दिवगंत मुख्यमंत्री जयललिता की ७० वीं जयंती मनाने के लिए विविध कार्यक्रमों का आयोजन किया जरा रहा था और सत्तारू़ढ अखिल भारतीय अन्ना द्रवि़ड मुनेत्र कषगम (अन्नाद्रमुक) के नेता अम्मा दोपहिया वाहन सब्सिडी योजना की तैयारियों में जुट थे। इसी क्रम में अन्नाद्रमुक के एक विधायक ने दिनाकरण खेमे में शामिल होने की घोषणा कर दी। पार्टी विधायक ए प्रभु ने टीटीवी दिनाकरण से मुलाकात की और उसके बाद सार्वजनिक तौर पर उनका समर्थन करने की घोषणा की। इसके साथ ही प्रभु सत्तारुढ पार्टी के २१ वें ऐसे विधायकों की सूची में शामिल हो गए हैं जिन्होंने खुलकर दिनाकरण का समर्थन किया है।प्रभु ने यहां पत्रकारों से बातचीत में कहा कि आरके नगर उपचुनाव के नतीजे साबित करते हैं कि दिनाकरण पार्टी के नेतृत्व के लिए लोकप्रिय पसंद थे। उन्होंने कहा कि वह अपने निर्वाचन क्षेत्र में जनता की सेवा करने मेंे असमर्थ थे क्योंकि उनकी पार्टी के ही लोग राह में पत्थर बने हुए थे। विधायक ने कहा कि दिनाकरण का समर्थन करने वाले १८ विधायकों में से कोई एक जल्द ही तमिलनाडु का मुख्यमंत्री बनेगा। उन्होंने कहा कि सत्तारू़ढ खेमे में अभी भी कई ऐसे विधायक हैं जो गुट बदलने का इंतजार कर रहे हैं।’’ उन्होंने कहा कि सत्तारुढ दल का अपने विधायकों के साथ ही अच्छा समन्वय नहीं है और जो विधायक अपने विधानसभा क्षेत्र में अच्छा कार्य करना चाहते हैं उन्हें भी अपना कार्य करने से रोका जाता है। ऐसे में कई ऐसे विधायक है जो अन्नाद्रमुक से ऊब चुके हैं। प्रभु ने कहा कि उन्होंने सत्तारुढ पार्टी के समक्ष कलाकुरुची को जिला मुख्यालय बनाने सहित कई अन्य मांगें रखी लेकिन उनकी मांगों को अनसुना कर दिया गया और अब दिनाकरण के साथ जु़डने के बाद उन्हें अपने निर्वाचन क्षेत्र में ठीक से काम करने की उम्मीद है। उन्होंने कहा कि वह पूर्व मुख्यमंत्री जयललिता के सिद्धांतों और आर्दशों का पालन करने वाले उनके एक सच्चे अनुयायी है और इसलिए उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री के जन्मदिवस के अवसर पर ही एक ऐसे व्यक्ति के साथ जाने का निर्णय लिया है जो सही मायने में उनके सिंद्धांतों और नीतियों का अनुकरण करता है। उन्होंने कहा कि अन्नाद्रमुक सिर्फ पूर्व मुख्यमंत्री जयललिता के पद चिन्हों का अनुसरण करने की बात कहती है बल्कि सही मायने में ऐसा करती नहीं है।ज्ञातव्य है कि दिनाकरण का समर्थन करने वाले १८ विधायकों को पिछले वर्ष विधानसभा पी धनपाल द्वारा विधानसभा सदस्य के रुप में आयोग्य करार दिया गया था। अयोग्य करार दिए गए विधायकों ने इस मामले को मद्रास उच्च न्यायालय में चुनौती दी है और इस पर जल्द निर्णय आने की उम्मीद है। पिछले कुछ समय से राज्य के राजनीतिक गलियारों में इस बात को लेकर भी चर्चा तेज है कि अन्नाद्रमुक के कोंगु क्षेत्र के कुछ नेता दिनाकरण के साथ लगातार बातचीत कर रहे हैं और उन्हें सत्तारुढ ध़डे में वापस आने के लिए मना रहे हैं। इसके लिए दिनाकरण ने कुछ दिनों पहले मुख्यमंत्री और उप मुख्यमंत्री के इस्तीफे के साथ ही कुछ शर्ते भी सत्तारुढ ध़डे के समक्ष रखी थी लेकिन बाद में अन्नाद्रमुक ने इस बात का खंडन किया था कि उसकी ओर से दिनाकरण से संपर्क किया गया है।प्रभु के पाला बदलने के बाद राज्य में इस बात को लेकर चर्चा तेज हो गई है कि दिनाकरण मद्रास उच्च न्यायालय से अपना समर्थन करने वाले १८ विधायकों के पक्ष में आदेश आने के बाद एक बार फिर से सरकार को गिराने की कोशिश कर सकते हैं। दिनाकरण ने शनिवार को यहां पत्रकारों से बातचीत में कहा कि सत्तारुढ ध़डे के कई विधायक उनके संपर्क में है और राज्य की अन्नाद्रमुक सरकार को जल्द ही गिरा दिया जाएगा। उन्होंने पत्रकारों से कहा कि मुझे जो सूचना मिली है उसके अनुसार पन्नीरसेल्वम चाहते हैं कि एक वर्ष पूरा होने के बाद पलानीस्वामी मुख्यमंत्री का पद उन्हें सौंप दें। हालांकि इस बात के लिए पलानीस्वामी तैयार नहीं है। इससे निराश होकर पन्नीरसेल्वम ने यह बात भी स्वीकार कर ली कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के कहने पर ही वह पलानीस्वामी के साथ आए। दिनाकरण ने कहा कि हम किसी पर अपने साथ आने के लिए दबाव नहीं बना रहे हैं।

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