talking with self
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बेंगलूरु। क्या आप अक्सर आत्मालाप (खुद से बातें) करते हैं? अगर ऐसा है तो आपको खुश होना चाहिए, क्योंकि अनुसंधानकर्ताओं का कहना है कि इससे अपकी सोच और समझ विकसित हो सकती है। सामान्य तौर पर खुद से बातें करना भले ही अच्छा प्रतीत नहीं होता है लेकिन अनुसंधानों से यह बात सामने आई है कि इससे बच्चों के बर्ताव को निर्देशित करने में मदद मिलती है।

नए अनुसंधान में यह जानने की कोशिश की गई है कि क्या इससे वयस्कों को भी मदद मिलती है। अनुसंधान में यह बात सामने आई कि खुद से बातें करने से वयस्कों की सोच, समझ और जवाब देने की क्षमता में काफी सुधार हुआ।

थोड़े दिनों का अवकाश ज्यादा खुशनुमा
यदि आप अपने जीवन में खुशहाली और यादों को संजोना चाहते हैं तो लंबे अवकाश पर न जाकर थोड़े-थोड़े अंतराल पर कम दिनों का अवकाश लेते रहें। नए अध्ययन में खुलासा हुआ है कि कम दिनों के अवकाश की ज्यादातर यादें खुशनुमा होती हैं। लोग अपनी एक विशेष जीवनशैली के आदि हो जाते हैं और जब वे लंबी छुट्टियों पर जाते हैं तो उन्हें कुछ दिन बाद ही ऊब होने लगती है।

रिपोर्ट के मुताबिक, लंबे अवकाश के दौरान पहला दिन सातवें दिन की अपेक्षा ज्यादा अच्छा होता है क्योंकि सातवें दिन तक उत्साह कम हो जाता है। रिपोर्ट का कहना है कि इसलिए सामान्य तौर पर साल में चार बार अवकाश पर जाना ज्यादा अच्छा होता है, इसकी तुलना में एक सप्ताह के अवकाश में उतनी खुशियां नहीं मिलतीं जितनी कि आप उम्मीद करते हैं।

वैसे अन्य विशेषज्ञ इस बात से सहमत नहीं हैं। उनका कहना है कि ज्यादा यात्राएं करने से केवल यात्रा का तनाव ही बढ़ता है। यदि आप तीन बार अवकाश पर जाते हैं तो आपको तीन गुना अधिक परेशानी होती है।

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